डेनमार्क के 4 शहर : 0 कार्बन उत्सर्जन की ओर

कार्बन उत्सर्जनकोपेनहेगेन (डेनमार्क)। ‘आई एम ए बिग जीरो’, यह प्रोजेक्ट जीरो ए/एस के प्रबंध निदेशक पीटर राथजे के बैज पर लिखा है। वह डेनमार्क के इस शहर को वर्ष 2029 तक कार्बन निरपेक्ष बनाने के मिशन पर काम कर रहे हैं। राथजे ने संवाददाता से कहा, “नहीं, मुझे इस बैज को पहली बार या बाद में भी लगाने में कोई परेशानी नहीं हुई।”

प्रोजेक्ट जीरो 75000 प्राणियों वाले इस शहर (यहां 4,40,000 सूअर और 2,50,000 मुर्गियां भी हैं) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से चलाया जा रहा है। इसका मूल मकसद निवेशकों, पर्यटकों को लोगों को इस शहर में रहने के लिए आकर्षित करना है, साथ ही हरित रोजगार के अवसर पैदा करना है।

प्रोजेक्ट जीरो का मकसद सोंडरबोर्ग को खेती, उद्योग व ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से निकाल कर एक हरित व्यवसाय आधारित अर्थव्यवस्था में तब्दील करना है। कार्बन निरपेक्षता प्राप्त करने के लिए इस शहर को ऊर्जा का कुशल उपयोग करना होगा, जिससे 7,22,000 टन कार्बन उत्सर्जन से ज्यादा न हो, जैसाकि साल 2007 के इस स्तर को आधारचिन्ह बनाया गया है।

मेयर एरिक लॉरिटजेन ने उनसे मिलने पहुंचे पत्रकारों के अंतर्राष्ट्रीय समूह को बताया, “प्रोजेक्ट जीरो सोंडरबोर्ग का एक लाइटहाउस प्रोजेक्ट है। इसका मकसद सोंडरबोर्ग को एक रहने और काम करने के लिए एक उत्तम जगह बनाना है।”

अन्य दो लाइटहाउस प्रोजेक्ट के जरिये नगर के बंदरगाह के सामने के इलाके को रिहायश में तब्दील किया जा रहा है और नगर को पर्यटक स्थल बनाया जा रहा है। राथजे के मुताबिक, इस परियोजना का मुख्य मकसद ऊर्जा दक्षता है, जिसे तर्कपूर्ण इस्तेमाल के जरिए ऊर्जा की मांग को सीमित कर पूरा किया जा रहा है।

इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा और जरूरत पड़ने पर आवश्यक हो तो जीवाश्म ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है, लेकिन जितना संभव हो उतनी कुशलता और साफ सफाई के बाद इसका उपयोग किया जाता है।

राथजे बताते हैं, “2005 व 2016 के बीच 35 फीसद कार्बन कटौती की गई और अब 2020 तक 50 फीसद कटौती का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान निर्माण, ऊर्जा परामर्श व ग्रीन डिस्ट्रिक्ट हिटिंग में 800 लोगों को रोजगार मिला।”

वर्ष 2020 के लिए तय लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में किए जा रहे कार्यकलापों के बारे में राथजे ने बताया कि ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए घरों, दफ्तरों, वाणिज्यिक भवनों में नई सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही सौरशक्ति, बायोगैस संयंत्र और सागरतटों पर पवनचक्की स्थापित करने से भी इस लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी।

राथजे ने बताया कि दो बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिसके बाद अब सार्वजनिक परिवहन की बसें बायोगैस से चलने लगी हैं। उन्होंने कहा कि कई घरों में औसतन 21000 यूरो के खर्च से नई सुविधाओं को संयोजन किया गया है। इसे नई नौकरियां भी पैदा हुई हैं और हर घर में 45 फीसद ऊर्जा खपत में बचत हुई है।

हरित पर सतत जोर देने के लिए बच्चों को सिखाया जाता है कि कचरा भी मूल्यवान है और विविध रूपों में इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी ओर, डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन ने साल 2025 तक कार्बन निरपेक्षता का लक्ष्य रखा है, जो सोंडरबोर्ग से चार साल आगे हैं।

कोपेनहेगेन के मेयर मोर्टन कैबेल के अनुसार, डेनमार्कवासियों को यह समझाना सबसे बड़ी चुनौती थी कि वे अपनी कारों को हटाकर सार्वजनिक परिवहन व साइकिल को उपयोग में लाएं। उन्होंने बताया, “मैंने अपने कार्यालय में इस्तेमाल होने वाली कार बेच दी और ई-बाइक से कार्यालय आना शुरू कर दिया।”

कोपेनहेगेन की आबादी 6,00,000 है, और कैबेल शहर के सात मेयरों में से एक हैं। कैबेल कहते हैं, “5-7 किलोमीटर की दूरी यहां लोग साइकिल से तय करते हैं। हम इसे बढ़ाकर 10 किलोमीटर करना चाहते हैं। लोग ई-बाइक्स का भी प्रयोग कर सकते हैं।”

ढेर सारे डेनमार्कवासी कोपेनहेगेन में काम पर जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। साइकिल के लेन यहां चौड़े बनाए गए हैं और प्रशासन उन्हें और चौड़ा बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि जगह की कमी ना पड़े और लोग कारों का प्रयोग करने के लिए हतोत्साहित हों।

वह कहते हैं, “कारें जगह घेरती है और औसतन केवल एक आदमी के आवागमन के काम आती है। ऐसे शहर की पहले से योजना बनानी चाहिए, जहां कारों का उपयोग होने वाला हो। वहां लोग कार खरीद सकते हैं और चला सकते हैं।”

कैबेल कहते हैं, “हम एक बढ़ता हुआ शहर हैं। शहर की आबादी सालाना दो फीसदी बढ़ जाती है। हमारे लिए अवसंरचना, स्कूलों और अन्य सुविधाओं को बढ़ाना एक चुनौती है।” साल 2025 तक कार्बन निरपेक्षता प्राप्त करने की चुनौती पर कैबेल का कहना है कि वर्तमान में तय की गई योजनाओं के मुताबिक शहर उस समय तक 92 फीसदी लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा, “शेष 8 फीसदी को हासिल करने के लिए नई योजनाओं को बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।” कैबेल ने कहा, “अब तक हमने लक्ष्य का 33 फीसदी प्राप्त कर लिया है। संपत्ति मालिकों से कहा जा रहा है कि वे अपनी इमारतों में विशिष्ट हीटिंग और कूलिंग सुविधा मुहैया कराएं।”

शहर ने उर्त्सजन को 2005 के स्तर पर रखने का आधारचिन्ह तय किया गया है। एक बॉयोमास ऊर्जा संयंत्र का भी निर्माण किया जा रहा है और साल 2020 तक यह काम करने लगेगा, जिससे शहर की 80 फीसदी हीटिंग प्रणाली कार्बन निरपेक्ष हो जाएगी।

कैबेल के मुताबिक, निगम द्वारा दिए गए डब्बों में घरों में कचरे को अलग-अलग करने से जैविक कचरे का प्रयोग बॉयोमास संयंत्र में किया जा सकता है। शहर की स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा दक्ष एलईडी बल्बों से बदल दिया गया है और ज्यादातर कचरा ट्रक गैस से चलाए जा रहे हैं।

‘लौहपुरुष’ की बात भूल गए सीएम साहब, लाए अधिकारी को ‘अर्दली’ बनाने का आदेश

छठ विशेष: विश्वकर्मा निर्मित है देव सूर्य मंदिर, भगवान भास्कर की होती है आराधना

 

=>
LIVE TV