
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ताईस सितंबर को नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास में राज्य के प्रवासियों और बुद्धिजीवियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य राज्य के विकास को गति देने के लिए उनके बहुमूल्य सुझाव मांगना और विकास कार्यों में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की प्रगति में विशेषज्ञों और राज्य के बाहर रहने वाले प्रवासियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को उनकी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि इस चर्चा में मिले तमाम प्रस्तावों को राज्य की आगामी नीतियों में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा।
राज्य के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने अपना विकास बजट बढ़ाकर 1.12 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। मुख्यमंत्री ने ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ के सदुपयोग पर विशेष जोर देते हुए बताया कि राज्य में पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के निरंतर विस्तार से रिवर्स माइग्रेशन (पलायन वापसी) में चौवालीस प्रतिशत की उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके साथ ही, राज्य की बेहतरीन कनेक्टिविटी निवेश का एक बड़ा आकर्षण बन रही है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर ने राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर दिया है, जबकि देहरादून अब देश के प्रमुख शहरों से पचास से अधिक हवाई सेवाओं के माध्यम से जुड़ चुका है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार और उधम सिंह नगर का पंतनगर प्रमुख औद्योगिक तथा कृषि हब के रूप में उभर रहे हैं, और पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट लॉजिस्टिक्स व औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। नीति आयोग की सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स रैंकिंग में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान मिलना इसी अनुकूल नीतिगत माहौल का परिणाम है।
सुशासन, शिक्षा और राज्य की जनसांख्यिकी को सुरक्षित रखने के लिए धामी सरकार ने कई कड़े और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसे समानता, न्याय और सुशासन का उत्कृष्ट मॉडल करार दिया, जिसने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूत किया है। राज्य की मूल पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए धर्मांतरण और दंगों के खिलाफ अत्यंत सख्त कानून लागू किए गए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है और ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान प्राधिकरण’ का गठन किया गया है ताकि सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के तहत नियमों का पालन न करने वाले ढाई सौ से अधिक मदरसों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और रोजगार में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए राज्य सरकार शुरू से ही संकल्पित रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पेपर लीक और नकल माफियाओं पर प्रहार करते हुए सौ से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं, और अब तक पैंतीस हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।
सरकारी नौकरियों के साथ-साथ युवा और महिलाएं होमस्टे, कृषि, बागवानी और छोटे होटलों के माध्यम से स्वरोजगार की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। राज्य की आर्थिकी का मुख्य स्तंभ माने जाने वाले पर्यटन क्षेत्र में भी भारी उछाल आया है। चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा के साथ-साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिससे सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
इसके अतिरिक्त, सड़कों, रेल और रोपवे के विस्तार तथा आगामी 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के साथ उत्तराखंड खुद को एक प्रमुख खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित कर रहा है।




