
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 नवंबर को खटीमा के अपने पैतृक गांव नगला तराई का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एक आधुनिकीकृत ‘मॉडल प्राइमरी स्कूल’ का उद्घाटन कर उसे स्थानीय समुदाय को समर्पित किया। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित इस गांव को भारत का “पहला गांव” बताते हुए सीएम धामी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं और बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी स्कूल से प्राप्त की थी।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्कूल से उनका गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव है और इस नए मॉडल ढांचे को जनता को समर्पित करते हुए उन्हें बेहद खुशी हो रही है। शिक्षा को बच्चों के सशक्तिकरण की कुंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का संकल्प है कि राज्य के हर कोने, विशेषकर सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को आधुनिक शिक्षा और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें ताकि वे हर स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इससे पहले 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून के पवेलियन ग्राउंड में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम में भी शिरकत की थी। भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं, खिलाड़ियों और प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवानों के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं।
सीएम धामी ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सबसे पहली पहचान ‘भारतीय’ होना है, जो हमें आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश के विकास के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और ‘रन फॉर यूनिटी’ जैसे आयोजन सरदार पटेल के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का एक बेहतरीन माध्यम हैं।



