
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार के रुख पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के चलते 200 से अधिक कथित भ्रष्ट लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में व्यक्ति की हैसियत या पद का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: धामी सरकार का सख्त रुख
सीएम धामी के अनुसार सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में अपनाया जा रहा है। प्रशासनिक पदानुक्रम में चाहे कोई किसी भी पद पर हो, भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक कार्यालयों में नागरिकों से संपर्क करने वाले अधिकारियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
राज्य सरकार ने रिश्वत के मामलों में सतर्कता कार्रवाई के महत्व पर भी जोर दिया है। जनवरी 2026 में हरिद्वार के जिला आपूर्ति अधिकारी और एक सहायक के रिश्वत मामले में गिरफ्तारी को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उदाहरण बताया गया।
उत्तराखंड 1064 हेल्पलाइन: जन शिकायतों का माध्यम
मुख्यमंत्री के अनुसार 1064 एंटी-करप्शन हेल्पलाइन नागरिकों के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट के अनुसार सतर्कता हेल्पलाइन 1064 सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सार्वजनिक सेवाओं में से एक है।
यह हेल्पलाइन नागरिकों को कथित भ्रष्टाचार की रिपोर्ट करने का साधन उपलब्ध कराती है। रिश्वत की मांग या सामान्य भ्रष्टाचार की शिकायतें इस हेल्पलाइन के माध्यम से सतर्कता विभाग को दी जा सकती हैं।
कनिष्ठ और वरिष्ठ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई
धामी के अनुसार भ्रष्टाचार के मामलों में कर्मचारियों के पदनाम के आधार पर फैसला नहीं लिया जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई कनिष्ठ हो या वरिष्ठ, भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मार्च 2025 में 1064 हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शिकायतों की गहन जांच की जाए और आरोप सही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 66 लोगों को ट्रैप में फंसाया गया और 72 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
समीक्षा में शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा तथा विभागों और सतर्कता विभाग के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया।
सुशासन और जवाबदेही प्रमुख फोकस क्षेत्र
धामी ने कहा कि सरकार के कामों से सुशासन और जवाबदेही का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सरकार ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के निपटारे और सतर्कता कार्रवाई को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
वर्ष 2025 की समीक्षा में अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि उन विभागों की पहचान की जाए जहां भ्रष्टाचार की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं और उनके कारणों का पता लगाया जाए। लंबे समय से एक ही विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण पर भी चर्चा हुई।
सीएम धामी के नए बयान से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के साथ अभियान जारी रखेगी।



