
विजयादशमी के पावन पर्व पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश और प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों ने इस अवसर पर समाज में सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने का आह्वान किया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से अपील की है कि वे अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और बुराई को त्यागकर समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को बढ़ावा दें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इस पर्व के गहरे महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की शाश्वत विजय का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह त्योहार हमें अपने आंतरिक दोषों पर विजय प्राप्त करने की प्रत्यक्ष प्रेरणा देता है।
धामी ने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने अंदर बैठे अहंकार और बुराई रूपी रावण का दहन करें और इसके स्थान पर समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे का दीप प्रज्वलित करें। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिकों से अपने आचरण में शुद्धता, कार्यों में पूर्ण निष्ठा और हृदय में राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण की भावना को फिर से जागृत करने का दृढ़ संकल्प लेने का भी आह्वान किया।
इसी तरह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विजयादशमी के शुभ अवसर पर जनता को बधाई देते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के उच्च आदर्शों को आत्मसात करने पर बल दिया। ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने सनातन धर्म के मूल वाक्य का उल्लेख करते हुए लिखा कि जहां धर्म है, वहीं विजय सुनिश्चित है। उन्होंने भगवान श्रीराम को मर्यादा, करुणा और आदर्शों का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पावन पर्व हमें अपने भीतर के अहंकार और नकारात्मक विचारों का पूर्ण रूप से त्याग करने की सीख देता है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में आगे कहा कि विजयादशमी का त्योहार हमें निरंतर सत्य, धर्म और सर्वजन हिताय (सभी के कल्याण) के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान श्रीराम सभी नागरिकों के जीवन में अपार सुख, परम शांति और निरंतर समृद्धि लेकर आएं।
विजयादशमी, जिसे देशभर में दशहरे के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की महान जीत का जश्न मनाने का दिन है। यह पावन अवसर व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में पनपने वाली नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करते हुए सदैव सत्य और धर्म की स्थापना करने की याद दिलाता है।




