
सर्दी के मौसम में अक्सर हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के मामलों में अचानक उछाल देखने को मिलता है। इसका मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि ठंड के संपर्क में आने से हमारी रक्त वाहिकाएं (Blood vessels) सिकुड़ जाती हैं। इस सिकुड़न के कारण शरीर में रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है और हृदय को पूरे शरीर में रक्त पंप करने के लिए पहले से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
इसके अलावा, आज के दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब जीवनशैली और अस्वस्थ खानपान ने दिल की बीमारियों को हर उम्र के लोगों के लिए एक गंभीर और जानलेवा खतरा बना दिया है।
जाने-अनजाने में अपनाई गई हमारी कई रोजमर्रा की आदतें हृदय के स्वास्थ्य पर गहरा आघात करती हैं। अत्यधिक जंक फूड, अधिक मीठे और तैलीय पदार्थों का लगातार सेवन शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा देता है, जो आगे चलकर धमनियों में ब्लॉकेज का कारण बनता है। इसके साथ ही, ऑफिस या घर में घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों का शून्य होना, धूम्रपान और शराब का सेवन हृदय की मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को बेहद कमजोर कर देते हैं।
आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता मानसिक तनाव और रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद न लेना भी कार्डियोवैस्कुलर (हृदय रोग) समस्याओं के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। ठंड के दिनों में इन सब के साथ शरीर को पर्याप्त गर्म न रखने की लापरवाही इन खतरों को कई गुना बढ़ा देती है।
हृदय को लंबे समय तक मजबूत और सेहतमंद बनाए रखने के लिए सबसे पहले हमें अपनी आहार योजना में सुधार करने की सख्त आवश्यकता है। अपने दैनिक भोजन में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को भरपूर मात्रा में शामिल करें। मूंगफली, बादाम और अखरोट जैसे नट्स के साथ-साथ एवोकाडो को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना दिल के लिए एक बेहतरीन टॉनिक का काम करता है, क्योंकि इनमें गुड फैट मौजूद होता है। पैकेट बंद, डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड भोजन से पूरी तरह परहेज करें और यह सुनिश्चित करें कि आपके भोजन में कैलोरी, सोडियम (नमक) और अस्वस्थ वसा (सैचुरेटेड फैट) की मात्रा न्यूनतम हो।
खानपान के साथ-साथ एक सक्रिय दिनचर्या हृदय को स्वस्थ रखने की दूसरी सबसे बड़ी चाबी है। अगर आप जिम नहीं जाना चाहते हैं, तो नियमित रूप से 30 से 40 मिनट तक तेज चलना (ब्रिस्क वॉक), साइकिल चलाना, या तैराकी करना भी दिल को गजब की मजबूती प्रदान करता है। इसके अलावा, हल्की वेट ट्रेनिंग से शरीर में ऐसी मांसपेशियों का विकास होता है जो हृदय के कार्यभार को कम करती हैं।
शारीरिक व्यायाम के अलावा मानसिक शांति के लिए योग, ध्यान (मेडिटेशन) और गहरी सांस लेने की तकनीक (प्राणायाम) का अभ्यास करें, जिससे तनाव का स्तर कम होता है। अपने वजन को हमेशा नियंत्रण में रखें, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं और शराब व सिगरेट से पूरी तरह दूरी बना लें। सर्दी के मौसम में घर से बाहर निकलते समय शरीर को अच्छी तरह गर्म कपड़ों से ढक कर ही निकलें और गर्म कमरे से अचानक ठंडी हवा में जाने से बचें।
अंत में, यह बेहद जरूरी है कि आप अपने शरीर द्वारा दिए जा रहे चेतावनी संकेतों को पहचानें और उन्हें सामान्य थकान या गैस समझकर नजरअंदाज न करें। यदि आपको कभी भी सीने में भारीपन, दर्द या जलन महसूस हो, थोड़ा चलने पर ही सांस फूलने लगे या सांस लेने में तकलीफ हो, बिना किसी शारीरिक मेहनत के अत्यधिक पसीना आए, दिल की धड़कनें अचानक तेज या अनियमित महसूस हों, लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहे या पैरों में बिना वजह दर्द बना रहे, तो यह हृदय रोग या हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद किए बिना तुरंत किसी विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाकर अपनी जांच करवाएं। आपका दिल आपके शरीर का इंजन है, थोड़ी सी सतर्कता और एक अनुशासित जीवनशैली अपनाकर आप इसे जीवन भर सुरक्षित रख सकते हैं।




