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इलाहाबाद हाईकोर्ट से आजम खान और उनके बेटे को दो पैन कार्ड मामले में बड़ी राहत, मिली जमानत

समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान तथा उनके विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से गुरुवार को एक बड़ी राहत मिली है। अदालत ने चर्चित ‘दो पैन कार्ड’ मामले में दोनों नेताओं को जमानत दे दी है और ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) द्वारा उन्हें सुनाई गई सजा को फिलहाल निलंबित कर दिया है। हालांकि, पिता-पुत्र की उस याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी।

यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति समीत गोपाल की एकल पीठ द्वारा सुनाया गया। आजम खान और उनके बेटे ने ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में उन्होंने सजा के निलंबन, दोषसिद्धि पर रोक और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी और विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने 15 अक्टूबर को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कानूनी जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट द्वारा सजा का निलंबन और जमानत मिलना दोनों नेताओं के लिए एक बड़ी अंतरिम राहत है। हालांकि, अदालत द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने का अर्थ यह है कि संबंधित चुनावी कानूनों के तहत उनकी चुनाव लड़ने की अयोग्यता अभी भी बरकरार रहेगी। जब तक दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगती, वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे।

क्या है बहुचर्चित ‘दो पैन कार्ड’ मामला?

यह पूरा मामला अब्दुल्ला आजम खान के पास दो अलग-अलग जन्मतिथियों वाले स्थायी खाता संख्या (पैन/PAN) कार्ड होने के आरोपों से संबंधित है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए और उनका उपयोग किया। इस धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में अब्दुल्ला आजम के साथ-साथ उनके पिता आजम खान के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू की गई थी, जिसमें निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।

जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा

इसी बीच, आजम खान की मुश्किलें अन्य मामलों में भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में 28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसकी जमीन और कई इमारतों को अटैच (कुर्क) कर लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुर्क की गई इस संपत्ति की कागजी (बुक) वैल्यू 426 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी अनुमानित मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है।

ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत की है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ चल रहे कथित मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले का हिस्सा है। जौहर नगर के सिंहानखेड़ा गांव में स्थित यह विशाल यूनिवर्सिटी परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है, जिसकी स्थापना स्वयं आजम खान ने की थी और वे ही इस ट्रस्ट के कर्ताधर्ता हैं। इसके अलावा, आजम खान इस यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति (चांसलर) भी हैं।

किसानों की जमीन और शत्रु संपत्ति पर कब्जे के आरोप

ED ने यह मनी लॉन्ड्रिंग की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 अलग-अलग प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर शुरू की थी। इन प्राथमिकियों में आरोप लगाया गया था कि आजम खान और उनके करीबियों ने यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए स्थानीय किसानों की कृषि भूमि पर कथित तौर पर जबरन कब्जा किया और उन्हें डराया-धमकाया। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 384 (जबरन वसूली) सहित कई अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

इसके अलावा, ED ने रामपुर जिला प्रशासन की एक जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) के 45 बहुमूल्य भूखंडों पर भी यूनिवर्सिटी के लिए अवैध रूप से कब्जा जमाया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस विशिष्ट जमीन पर ट्रस्ट को दिया गया पट्टा (लीज) सरकार द्वारा बहुत पहले निरस्त कर दिया गया था, इसके बावजूद इस पर ट्रस्ट का कथित अवैध कब्जा जारी रहा।

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