
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य और कूटनीतिक संकट ने एक बार फिर मध्य पूर्व सहित पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दोनों देशों के बीच दोबारा युद्ध छिड़ता है, तो हिंद महासागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा।
हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, तेहरान ने किसी भी संभावित नौसैनिक टकराव से निपटने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत कर लिया है और वह हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार है।
अपनी सामरिक ताकत और आक्रामकता का प्रदर्शन करते हुए ईरान ने दावा किया है कि उसने अपनी उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइलों की मारक क्षमता और गति को मैक 6 से बढ़ाकर मैक 10 तक पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, तेहरान ने अपने एयर डिफेंस नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ईडब्ल्यू) सिस्टम को भी पहले से कहीं अधिक आधुनिक बनाने का दावा किया है।
रेजाई ने स्पष्ट किया है कि ईरान के शस्त्रागार में कई अन्य अचूक सैन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जिन्हें अब तक गुप्त रखा गया है और उनका इस्तेमाल बिल्कुल सही समय पर किया जाएगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों द्वारा इन ईरानी दावों की अभी तक पुष्टि नहीं की गई है।
इस सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ का मुद्दा सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी पुरानी कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता और तेहरान की शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक इस अहम जलमार्ग को दोबारा खोलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक ये कड़ी शर्तें पहुंचाई जा चुकी हैं। ईरान वर्तमान में सैन्य सख्ती दिखाने के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत के रास्तों पर समानांतर रूप से आगे बढ़ रहा है, ताकि दबाव की राजनीति को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।
दूसरी ओर, अमेरिका भी इस आक्रामक रवैये का जवाब देने की पूरी रणनीति तैयार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ एक बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन फिलहाल ‘निर्णायक मोड’ (deciding mode) में है और आने वाले समय में दुनिया कुछ “बहुत बड़ी घटनाओं” की गवाह बन सकती है।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सभी सैन्य और रणनीतिक विकल्पों पर विचार करने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी और दोनों तरफ से आ रही धमकियों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।



