
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर (साउथ कैंपस) के पास एक संकरी गली में स्थित 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर जमींदोज हो गई।
इस इमारत का इस्तेमाल लड़कों के छात्रावास (बॉयज हॉस्टल) के रूप में किया जा रहा था। इस भयानक हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। घटना का एक दिल दहला देने वाला सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के गिरते ही चारों ओर धूल का भारी गुबार उठता हुआ साफ देखा जा सकता है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनकी सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया। सीएम रेखा गुप्ता ने मौके पर बचाव कार्य में जुटी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम और अधिकारियों से हालात का जायजा लिया।
घटना पर दुख और रोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा, “अब तक 80 फीसदी मलबा हटाया जा चुका है, जिसमें से 12 लोगों को निकाला गया। इनमें से 6 लोगों की मौत हो चुकी है और 6 गंभीर रूप से घायल हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के दिशा-निर्देश भी हमें लगातार मिल रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की खतरनाक इमारतों को खाली करा लिया गया है और बगल वाली जर्जर इमारत को भी जल्द गिराया जाएगा। सीएम ने स्पष्ट किया कि दिल्ली की सभी पुरानी इमारतों का ऑडिट कराया जाएगा और इस हादसे में जिन अधिकारियों की भी अनदेखी या लापरवाही सामने आएगी, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
बचाव कार्यों की चुनौतियों पर बात करते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ की टीम बहुत ही सावधानी से मलबा हटा रही है क्योंकि बगल की 40-50 साल पुरानी इमारत को भी खतरा बना हुआ है। सिरसा ने जानकारी दी कि एनडीआरएफ के अधिकारियों से उनकी बात हुई है और ढांचा अस्थिर होने के कारण बगल वाली इमारत को तुरंत गिराना संभव नहीं है, हालांकि उसे खाली करा लिया गया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर उन्होंने बताया कि यह इमारत काफी पुरानी थी और इसके बेसमेंट में अवैध रूप से खोदाई का काम चल रहा था, जो इस बड़े हादसे का मुख्य कारण बना।
इस त्रासदी में अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की दो टीमों के 70 जवान और डॉग स्क्वाड मौके पर मुस्तैद हैं। दिल्ली एम्स प्रशासन के मुताबिक, अस्पताल में चार छात्रों को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि बेसमेंट में काम कर रहे एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई। एक अन्य व्यक्ति ने देर रात दम तोड़ दिया। चूंकि यह इलाका डीयू साउथ कैंपस के बिल्कुल करीब है, इसलिए यहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में डर और मातम का माहौल है।




