
नई दिल्ली: देश के कोने-कोने में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बेहद हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर जहां देश के सभी प्रमुख मंदिरों को भव्य और आकर्षक रूप से सजाया गया है, वहीं श्रद्धालु पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी के इस विशेष पर्व पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को शास्त्रों में बेहद खास और फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस महासंयोग में की जाने वाली पूजा-अर्चना का भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
जन्माष्टमी पर ये रहेगा शुभ मुहूर्त
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व पर भगवान बाल गोपाल की पूजा-अर्चना के लिए पांच विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन मुहूर्तों में कान्हा की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।
चर योग: सुबह 6:00 बजे से 7:35 बजे तक
अमृत बेला: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक
शुभ योग: दोपहर 12:20 बजे से 1:53 बजे तक
चर योग (शाम): शाम 5:05 बजे से 6:40 बजे तक
लाभ बेला: रात 9:30 बजे से 10:55 बजे तक
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा की संपूर्ण सामग्री
- फूल माला
- पूजन और अर्चन सामग्री
- रोली
- अक्षत (साबूत चावल)
- पीला चंदन
- धूप, अगरबत्ती
- शुद्ध घी का दीपक
- अखंड ज्योति
- कपूर
- माचिस
- इत्र (सुगंध के लिए)
- श्री कृष्ण को झुलाने के लिए झूला
- शंख और घंटी (आरती के लिए)
जन्माष्टमी व्रत के सबसे जरूरी नियम कौन-से हैं?
- जन्माष्टमी से एक दिन पहले हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा है। व्रत के दिन भी खान-पान में संयम रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा बनाए रखें।
- धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी का व्रत निर्जल और निराहार रखने का उल्लेख मिलता है, लेकिन ऐसा करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
- भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान लड्डू गोपाल को तुलसी दल अर्पित करें और दिनभर श्रीकृष्ण के नाम का जाप या स्मरण करते रहें।
- व्रत के दौरान केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। क्रोध, विवाद, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर मन को भगवान की भक्ति में लगाना शुभ माना जाता है।
- जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि यानी निशिता काल में मनाया जाता है। पूजा और जन्मोत्सव के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलने या अगले दिन पारण करने का नियम अपनाएं।
जन्माष्टमी पूजा विधि
- घर के मंदिर में एक पीले कपड़े पर बाल गोपाल की मूर्ति स्थापित करें।
- उन्हें झूला, पालना, बांसुरी, मोर पंख, फूल इत्यादि अर्पित करें।
- भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं और कुंदन या फूलों का मुकुट पहनाएं।
- साथ में तुलसी की माला पहनाएं।
- बाल गोपाल को झूले में विराजमान करें।
- रात 12 बजे उनका पंचामृत से अभिषेक करें।
- स्नान कराने के बाद उनका भव्य शृंगार करें।
- रोली, अक्षत, धूप, दीपक, घी, फूल इत्यादि से विधि विधान पूजा करें।
5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव
कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा. भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है.




