
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के साथ वायरल और मौसमी बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तथा पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है।
शनिवार को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में तय किया गया कि बिना अपरिहार्य कारण के कोई भी अवकाश स्वीकृत नहीं होगा। पहले से स्वीकृत छुट्टियां भी शासन की अनुमति के बिना निरस्त मानी जाएंगी।
हर अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड
डिप्टी सीएम ने निर्देश दिया कि हर सरकारी अस्पताल में स्क्रीनिंग काउंटर तुरंत सक्रिय किया जाए और फ्लू मरीजों के लिए 10 से 20 बिस्तरों का आइसोलेशन वार्ड बनाया जाए। लखनऊ के बड़े अस्पतालों में 25-25 बिस्तरों के विशेष वार्ड स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को अस्पताल से लौटने की शिकायत नहीं आनी चाहिए। मास्क, सैनिटाइजर और बुखार प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हो। जांच, दवा और बिस्तर की हर हाल में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
निजी अस्पतालों और लैब पर नजर
बैठक में निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से सहयोग की अपील की गई। स्वाइन फ्लू समेत किसी भी संक्रमण की पॉजिटिव रिपोर्ट की सूचना तुरंत शासन को भेजी जाए। दिल्ली-एनसीआर से सटे जिलों में मिलने वाले मरीजों की यात्रा हिस्ट्री की गहराई से जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर होम आइसोलेशन की सलाह दी जाए।
रोजाना रिपोर्ट और निगरानी
समीक्षा के बाद अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने सभी अधिकारियों के साथ अलग से बैठक की। उन्होंने पिछले चार सालों में अगस्त से नवंबर के बीच फैलने वाली बीमारियों के आंकड़ों की समीक्षा की और अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली।
सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों और अपर महानिदेशक स्वास्थ्य को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के अस्पतालों का दौरा कर स्वास्थ्य तैयारियों की रोजाना रिपोर्ट दें। बलरामपुर अस्पताल में स्वाइन फ्लू से एक महिला की मौत के बाद राज्य में निगरानी और सख्त कर दी गई है।



