
संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को उच्च सदन में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस एक्शन को लेकर भारी हंगामा हुआ। राज्यसभा में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रख रहे जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जोरदार तीखी बहस देखने को मिली।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को अंजाम देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। खरगे ने सदन में सवाल किया कि छात्रों पर हमला करने वाले लोग खुलेआम क्यों घूम रहे हैं, वे वहां क्यों गए थे और पुलिस को यह आदेश किसने दिया था। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने भी उनका समर्थन करते हुए जमकर हंगामा किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस विषय पर आधिकारिक बयान देने की मांग रखी।
विपक्ष के इन तीखे सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। नड्डा ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक बेहद सामान्य प्रक्रिया करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए कानून के दायरे में रहकर अपना काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर इस पूरे मामले को बेवजह तूल देने और सनसनीखेज बनाने का भी आरोप लगाया।
जवाब देते समय जेपी नड्डा ने अपने छात्र जीवन के दिनों और अनुभवों को भी सदन के सामने साझा किया। उन्होंने कांग्रेस सरकार के दौरान लगे आपातकाल का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि उस समय उन्हें भी छात्र आंदोलनों का हिस्सा होने के कारण कई बार गिरफ्तार किया गया था। नड्डा ने स्पष्ट किया कि जो भी छात्र सक्रिय राजनीति या एक्टिविज्म से जुड़ता है, उसे स्वाभाविक तौर पर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है और यह एक बेहद सामान्य बात है।



