उत्तराखंड

ऋषिकेश: बजरंग सेतु के ‘ग्लास वॉकवे’ पर चलने के लिए लग सकता है टिकट, कांवड़ यात्रा में रहेगा बंद

उत्तराखंड सरकार ऋषिकेश में पुराने लक्ष्मण झूला के पास नवनिर्मित सस्पेंशन ब्रिज ‘बजरंग सेतु’ के संचालन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, पुल के पारदर्शी ‘ग्लास वॉकवे’ (कांच के रास्ते) पर चलने वाले पर्यटकों को इसके लिए प्रवेश शुल्क (Entry Fee) देना पड़ सकता है। इसके अलावा, भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों को देखते हुए वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान इस ग्लास वॉकवे को पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

मुख्य रास्ते पर आवाजाही रहेगी मुफ्त, ग्लास वॉकवे के लिए टिकट

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पुल के उपयोग को विनियमित करने और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए SOP को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पुल के मध्य भाग (मुख्य रास्ते) से सामान्य पैदल आवाजाही मुफ्त रहेगी, लेकिन पुल के दोनों ओर बने पारदर्शी कांच के रास्ते पर गंगा नदी के ऊपर चलने का रोमांच महसूस करने वाले लोगों को टिकट खरीदना पड़ सकता है।

69.20 करोड़ की लागत और ब्रिज की खासियतें

  • बजट और आकार: लगभग 69.20 करोड़ रुपये की लागत से बना बजरंग सेतु 132.30 मीटर लंबा और लगभग 8.60 मीटर चौड़ा है।
  • ग्लास की मजबूती: पुल के दोनों किनारों पर बनाए गए ग्लास फुटपाथ में ‘टफन ग्लास’ की 5 परतें लगाई गई हैं। प्रत्येक परत लगभग 12 मिमी मोटी है, जिससे इसकी कुल मोटाई करीब 60 मिमी हो गई है, जो इसे अत्यधिक मजबूत और सुरक्षित बनाती है।
  • पुराने और जर्जर हो चुके लक्ष्मण झूला (करीब 90 साल पुराने) को सुरक्षा कारणों से बंद किए जाने के बाद 2022 में बजरंग सेतु का निर्माण शुरू हुआ था।

निर्माण के दौरान टूटे थे शीशे, अब सुरक्षा के कड़े इंतजाम

निर्माण और टेस्टिंग के दौरान कांच के हिस्सों में कई बार नुकसान देखने को मिला था। जनवरी 2026 में एक मजदूर के हाथ से हथौड़ा गिरने से शीशा टूट गया था। इसके बाद अप्रैल और मई 2026 में भी कांच की ऊपरी परतों में दरारें आने की घटनाएं सामने आई थीं। हालांकि, बाकी चार परतें सुरक्षित रहीं, जिससे ढांचे को कोई खतरा नहीं हुआ।

इन घटनाओं से सबक लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने निगरानी और रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है। पुल पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, लाइटिंग में सुधार किया जा रहा है और सुरक्षा बढ़ाने के लिए साइड बैरियर की ऊंचाई भी बढ़ाई गई है।

कांवड़ यात्रा के दौरान क्यों रहेगा बंद?

कांवड़ यात्रा के दौरान ऋषिकेश में लाखों कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में भीड़भाड़ को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्लास वॉकवे को यात्रा के दौरान पूरी तरह बंद रखा जाएगा। हालांकि, तीर्थयात्री इस दौरान पुल के सामान्य पैदल हिस्से का उपयोग कर सकेंगे।

टिकट व्यवस्था से होगा पुल का रखरखाव

प्रस्तावित SOP के तहत यह तय किया जाएगा कि एक समय में ग्लास वॉकवे पर अधिकतम कितने लोग जा सकते हैं। पीडब्ल्यूडी के डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने मीडिया को बताया कि दुनिया के कई देशों में इस तरह के ग्लास ब्रिज आकर्षणों के लिए टिकट व्यवस्था लागू है। प्रस्तावित टिकटिंग प्रणाली से होने वाली आय का उपयोग इस विशेष ग्लास संरचना की परिचालन और रखरखाव लागत को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

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