
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले के कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता को कई दिनों की फरारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में परीक्षा पेपर लीक के कई मामलों से जुड़ा गुप्ता, बिहार के विभिन्न इलाकों में महाराष्ट्र पुलिस की लगातार छापेमारी के बावजूद गिरफ्तारी से बचता आ रहा था।
पुलिस ने इस अभियान में गुप्ता के साथ एक अन्य आरोपी को भी पकड़ा है। यह अहम कामयाबी महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गुप्ता की पत्नी सहित टीईटी पेपर लीक मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने के कुछ ही दिनों बाद मिली है।
स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था बड़ा खुलासा
बिजेंद्र गुप्ता साल 2024 में नीट (NEET) पेपर लीक के बाद ‘इंडिया टुडे’ द्वारा किए गए एक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन के बाद सुर्खियों में आया था। उस दौरान, गुप्ता ने कथित तौर पर पेपर लीक सिंडिकेट की कार्यप्रणाली के बारे में खुलकर बात की थी और प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने के तरीकों का खुलासा किया था। उसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली की खामियों को भी उजागर किया था और दावा किया था कि संगठित गिरोह इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर आसानी से पेपर लीक कराते हैं।
जांचकर्ताओं का मानना है कि बिजेंद्र गुप्ता ने देश भर में कई पेपर लीक मामलों में अहम भूमिका निभाई है, जिससे वह महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक जांच में सबसे वांछित (Most Wanted) आरोपियों में से एक बन गया था। पुलिस आगे की पूछताछ के लिए गुप्ता को ट्रांजिट रिमांड पर महाराष्ट्र लाएगी। अधिकारी देश भर में चल रहे अन्य परीक्षा पेपर लीक रैकेट से उसके कथित संबंधों की भी गहन जांच कर रहे हैं।
पहले भी कई आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां कर चुकी है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी सुमन गुप्ता शामिल थी, जिसे बिहार से हिरासत में लिया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि वह पेपर लीक रैकेट के बारे में पूरी तरह वाकिफ थी और सिंडिकेट से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन उसकी मौजूदगी में ही हुए थे। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या पेपर लीक के काले धन से दिल्ली और पटना में संपत्तियां खरीदी गई थीं।
इसके अलावा, 3 जुलाई को विशेष जांच दल (SIT) ने तीन और आरोपियों- कपिल दहिया, मिथुन सिंह और सोनू सिंह को गिरफ्तार किया था।
- हरियाणा के सोनीपत निवासी कपिल दहिया पर लीक हुए टीईटी प्रश्नपत्रों के खरीदारों की पहचान करने और उन्हें बेचने के लिए मुंबई जाने का आरोप है।
- बिहार से गिरफ्तार मिथुन सिंह पर लीक हुए पेपर बांटने के लिए पुणे जाने का आरोप है।
- बिहार के हाजीपुर से गिरफ्तार सोनू सिंह पर गुप्ता के लिए फर्जी पहचान पत्र (ID) बनाने और सिंडिकेट को लॉजिस्टिक मदद देने का आरोप है। पुलिस को शक है कि सोनू से जुड़ी जगहों पर ही लीक हुए परीक्षा के पेपर छापे गए थे।
28 जून को होनी थी परीक्षा
इस पूरे रैकेट की जांच तब शुरू हुई थी, जब पुलिस ने 28 जून को होने वाली परीक्षा से ठीक पहले ठाणे के कोनगांव इलाके में तीन संदिग्धों (आकाश कुमार, राजीव कुमार और धीरज सिंह) को लीक हुए टीईटी प्रश्नपत्र बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया था। इस घटना के तुरंत बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने परीक्षा को स्थगित कर दिया था, जिससे लगभग छह लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए थे। इसके बाद एसआईटी ने पूरे पेपर लीक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कई राज्यों में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया था।




