स्वास्थ्य

मानसून में भी हो सकती है ‘ड्राई आइज’ की समस्या: जानें बारिश के मौसम में आंखों में जलन के कारण, लक्षण और बचाव के टिप्स

ज्यादातर लोगों के लिए मानसून का मौसम गर्मियों की भीषण चिलचिलाती धूप से एक बड़ी राहत लेकर आता है। हालांकि, मौसम में ठंडक और बदलाव आने के साथ ही हमारे शरीर में भी कई परिवर्तन होते हैं, जो हमेशा फायदेमंद नहीं होते। अगर आपको भी बारिश के मौसम में आंखों से पानी आने, खुजली, जलन या असहजता महसूस हो रही है, तो आप अकेले नहीं हैं।

अक्सर लोग यह मानते हैं कि ‘ड्राई आइज’ (आंखों का सूखापन) केवल गर्मियों की समस्या है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार मानसून भी आंखों में जलन और परेशानी को ट्रिगर कर सकता है। मौसमी बदलाव, नमी (ह्यूमिडिटी) के स्तर में उतार-चढ़ाव, बाहर की नमी और अंदर के एयर-कंडीशंड (AC) माहौल के बीच लगातार आना-जाना, धूल-मिट्टी, एलर्जी और स्क्रीन पर अधिक समय बिताना—ये सभी कारण आपकी आंखों की सुरक्षा करने वाली ‘टीयर फिल्म’ (आंसुओं की परत) को प्रभावित कर सकते हैं।

ड्राई आई डिजीज (Dry Eye Disease) क्या है?

वाइटफील्ड स्थित अग्रवाल आई हॉस्पिटल के डॉ. अमोद नायक के अनुसार, हमारी आंखों की सतह एक नाजुक ‘टीयर फिल्म’ द्वारा सुरक्षित रहती है, जो तीन परतों से बनी होती है: तैलीय (Oily), जलीय (Watery) और म्यूकस (Mucous)। ये तीनों परतें मिलकर आंखों में नमी बनाए रखती हैं, दृष्टि को स्पष्ट रखती हैं और संक्रमण से बचाती हैं।

ड्राई आई की समस्या तब उत्पन्न होती है जब यह टीयर फिल्म अस्थिर हो जाती है। ऐसा या तो आंखों में पर्याप्त आंसू न बनने के कारण होता है, या फिर आंसुओं के बहुत जल्दी सूख (Evaporate) जाने के कारण। इसका एक बड़ा कारण ‘मीबोमियन ग्लैंड्स’ का ठीक से काम न करना है, जो वह तैलीय परत बनाते हैं जिससे आंसू जल्दी सूखते नहीं हैं।

डॉ. नायक बताते हैं, “यूं तो मानसून में बाहर की नमी आंखों के लिए फायदेमंद लग सकती है, लेकिन बार-बार पर्यावरण में बदलाव, एसी (AC) की हवा, एलर्जी, धूल और प्रदूषण टीयर फिल्म को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे पहले से ड्राई आई की समस्या वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।”

आपकी आंखें ड्राई हैं, इसके प्रमुख लक्षण:

ड्राई आइज का मतलब केवल आंखों का सूखना ही नहीं है। कई बार आंखों से अत्यधिक पानी आना भी इस बात का संकेत होता है कि आपकी आंखें खुद को नम रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। डॉ. नायक के अनुसार, इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • आंखों में सूखापन या किरकिरापन महसूस होना
  • आंखों में जलन या चुभन होना
  • लालिमा (Redness) और खुजली
  • आंखों से लगातार पानी आना
  • धुंधला दिखना, जो पलकें झपकाने के बाद ठीक हो जाता है
  • पढ़ने या डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल के बाद आंखों में भारीपन या थकान
  • रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (Light sensitivity) का बढ़ना

मानसून में आंखों को सुरक्षित रखने के टिप्स

कुछ आसान से उपायों को अपनाकर आप बारिश के मौसम में भी अपनी आंखों को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं:

  • आंखों की सफाई का रखें ध्यान: अपनी आंखों को बार-बार न रगड़ें, इससे जलन बढ़ सकती है और संक्रमण का खतरा रहता है। मानसून में आंखों में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आंखों को छूने से पहले हमेशा अपने हाथ धोएं।
  • 20-20-20 का नियम अपनाएं: स्क्रीन पर लगातार देखने से पलक झपकाने की दर कम हो जाती है, जिससे आंसू जल्दी सूख जाते हैं। डॉ. नायक हर 20 मिनट में 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखने की सलाह देते हैं। इससे आंखों को आराम मिलता है।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखने से पर्याप्त आंसू बनने में मदद मिलती है, हालांकि क्रोनिक ड्राई आई के लिए केवल पानी पीना ही काफी नहीं है।
  • बाहर निकलते समय सावधानी: बारिश या तेज हवा में बाहर जाते समय छाते या प्रोटेक्टिव ग्लासेस (चश्मे) का इस्तेमाल करें ताकि आंखों को धूल, गंदगी और अन्य बाहरी तत्वों से बचाया जा सके।
  • आई ड्रॉप्स का सही इस्तेमाल: लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स (Eye drops) से आंखों के सूखेपन में राहत मिल सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल हमेशा आंखों के डॉक्टर (Ophthalmologist) की सलाह पर ही करें। बिना डॉक्टर की सलाह के लालिमा कम करने वाले ड्रॉप्स न लें, ये स्थिति को बिगाड़ सकते हैं।
  • कॉन्टैक्ट लेंस यूजर्स रहें सतर्क: कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों को मानसून के दौरान लेंस की सफाई और उन्हें बदलने के सही समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि संक्रमण का जोखिम कम हो सके।

ड्राई आइज या आंखों की एलर्जी? समझें अंतर

ड्राई आई डिजीज और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (Allergic conjunctivitis) दोनों ही मामलों में आंखें लाल होती हैं और पानी आता है, जिससे इनमें अंतर कर पाना मुश्किल होता है। डॉ. नायक बताते हैं कि गंभीर खुजली आमतौर पर एलर्जी का संकेत होती है। चूंकि दोनों का इलाज अलग-अलग होता है, इसलिए घरेलू या ओवर-द-काउंटर (मेडिकल स्टोर से ली गई) दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय किसी नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

मौसम बदलने पर हल्की जलन होना आम बात है, लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहे तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। डॉ. नायक के अनुसार, “लगातार सूखापन, गंभीर लालिमा, आंखों में दर्द, आंखों से कीचड़ या डिस्चार्ज आना, रोशनी से दिक्कत या धुंधलापन होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। समय रहते जांच होने से ड्राई आई का बेहतर इलाज हो सकता है और आंखों की सतह को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।”

(इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।)

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