
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेझेश्कियन से फोन पर बातचीत की। चर्चा का मुख्य मुद्दा पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति रहा।
पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेझेश्कियन से गंभीर स्थिति पर चर्चा की। क्षेत्र में तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान-माल की हानि और अवसंरचना क्षति पर गहरी चिंता जताई। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वस्तुओं-ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाध आवाजाही भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताएँ बनी रहेंगी।”
प्रधानमंत्री ने भारत की शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और संकट के समाधान के लिए संवाद व कूटनीति पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक (ज्यादातर छात्र, व्यापारी, तीर्थयात्री) हैं। दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है और अज़रबैजान, आर्मेनिया जैसे पड़ोसी देशों से वाणिज्यिक उड़ानों से भारत लौटने में मदद की जा रही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन बार बात की, जिसमें व्यावसायिक शिपिंग और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस रहा। इन वार्ताओं के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारतीय तेल टैंकरों का परिवहन स्थिर हुआ है, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
सरकार का कहना है कि भारतीय हितों की रक्षा के लिए उच्च-स्तरीय कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।


