उत्तर प्रदेशकानपुर

यूपी में मार्च में दिसंबर-जनवरी जैसा घना कोहरा: पहली बार ऐसा अभूतपूर्व बदलाव, मौसम विभाग ने बताया क्लाइमेट इमरजेंसी

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार सुबह मार्च के महीने में पहली बार दिसंबर-जनवरी जैसी घनी धुंध और कोहरा छाया रहा, जिसने पर्यावरण विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। कानपुर मंडल समेत बुंदेलखंड के इलाकों में सुबह 11 बजे तक सफेद कोहरे की चादर छाई रही। दृश्यता महज 25 मीटर तक सिमट गई, जबकि नदियों और जलाशयों के किनारे दृश्यता शून्य हो गई। हाईवे और एक्सप्रेसवे पर वाहन रेंगते नजर आए।

यह घटना अभूतपूर्व है क्योंकि इतिहास में मार्च में इतना घना कोहरा पहले कभी दर्ज नहीं किया गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इसे रेडिएशन फॉग नाम से दर्ज किया और क्लाइमेट इमरजेंसी (जलवायु आपातकाल) की संज्ञा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है।

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि फरवरी के अंत से तापमान में अप्रत्याशित तेजी आई। मार्च से हर दिन औसतन 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो रही थी, जिससे पृथ्वी की ऊपरी सतह बहुत गर्म हो गई। सोमवार रात अचानक हवा में नमी बढ़ी और तापमान 6 डिग्री गिर गया। गर्म सतह ने तेजी से गर्मी छोड़ी, जो नमी से मिलकर रेडिएशन फॉग में बदल गई। यह कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ा गंभीर संकेत है।

पर्यावरणविद् डॉ. बबिता यादव ने कहा कि तापमान में ऐसे उतार-चढ़ाव ईकोसिस्टम को असंतुलित कर रहे हैं। भविष्य में बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि और अब बेमौसम कोहरा खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सूरज निकलने के साथ कोहरा छंट गया, लेकिन यह जलवायु संरक्षण के लिए गहरे सवाल छोड़ गया है।

आईएमडी ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर अध्ययन शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

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