
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की संभावना है।
विपक्ष का आरोप है कि सदन संचालन में पक्षपात हुआ, सांसदों को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और महिला सांसदों पर बेबुनियाद कार्रवाई हुई। प्रस्ताव के मुख्य प्रस्तावक कांग्रेस के के सुरेश, गौरव गोगोई और अन्य हैं, जिस पर करीब 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए लोकसभा में साधारण बहुमत यानी 272 वोट जरूरी हैं। लेकिन वर्तमान गणित विपक्ष के पक्ष में नहीं दिखता।
- एनडीए (NDA) के पास लोकसभा में करीब 293 सांसद हैं, जिसमें भाजपा और सहयोगी शामिल हैं।
- इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के पास कुल मिलाकर 238 के आसपास सांसद हैं, भले ही टीएमसी जैसे दल इसका समर्थन करें।
यह प्रस्ताव सदन में चर्चा तो जरूर होगा और हंगामा भी संभव है, लेकिन पारित होने की संभावना बहुत कम है। यह मुख्य रूप से सरकार और स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव 39 साल बाद आया है, जो सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।
विपक्ष के पास संख्या बल की कमी के कारण यह प्रस्ताव बहस तक सीमित रहने की अधिक संभावना है।



