
मध्य पूर्व में अमेरिका-इस्राइल-ईरान संघर्ष तेज होने के साथ-साथ सऊदी अरब पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इन हमलों में सऊदी ऊर्जा सुविधाओं और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया बताया जा रहा है।
इस बीच सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। बैठक में ईरानी हमलों और संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत जवाबी कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा हुई।
खालिद बिन सलमान ने X पर लिखा:
“पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। हमने सऊदी अरब पर ईरानी हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा की, जो हमारे संयुक्त रक्षा समझौते के दायरे में है। ऐसे कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं। उम्मीद है कि ईरान समझदारी दिखाएगा और गलतफहमी से बचेगा।”
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता (सितंबर 2025)
सितंबर 2025 में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाक पीएम शहबाज शरीफ ने स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत सैन्य संबंध और मजबूत हो गए हैं।
पाकिस्तान की भूमिका क्यों अहम?
पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब में सैन्य सहयोग देता रहा है, जिसमें ट्रेनिंग और रक्षा सहायता शामिल है। नए समझौते के बाद ईरानी हमलों पर पाकिस्तान की भागीदारी की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, पाकिस्तान आर्थिक संकट, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और पड़ोसी देशों से संबंधों के कारण बड़े संघर्ष में सीधे शामिल होना मुश्किल मान रहा है।



