
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थिति अगर लंबी चली तो भारत के कई महत्वपूर्ण सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसी CRISIL Ratings की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बासमती चावल, उर्वरक, डायमंड पॉलिशिंग, ट्रैवल ऑपरेटर और एयरलाइंस जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि इनका बड़ा कारोबार मिडिल ईस्ट से जुड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरेमिक और उर्वरक सेक्टर, जो LNG पर निर्भर हैं, उत्पादन में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। क्रूड ऑयल से जुड़े सेक्टर जैसे ऑयल रिफाइनरी, टायर, पेंट, स्पेशियलिटी केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और सिंथेटिक टेक्सटाइल भी लागत बढ़ने से प्रभावित होंगे।
भारत अपनी 85% क्रूड ऑयल और आधा LNG आयात करता है, जिसमें 40-50% क्रूड और 50-60% LNG होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। 1 मार्च 2026 से कई जहाजों ने इस रूट से गुजरना बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
कीमतें तेजी से बढ़ीं – ब्रेंट क्रूड जनवरी-फरवरी के 66-67 डॉलर/बैरल से बढ़कर 82-84 डॉलर/बैरल हो गया, जबकि एशियाई स्पॉट LNG 10 डॉलर/MMBtu से 24-25 डॉलर/MMBtu तक पहुंच गया। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है, महंगाई पर असर पड़ सकता है और कंपनियों की लाभप्रदता दबाव में आ सकती है।
बासमती चावल का 70-72% निर्यात मिडिल ईस्ट को जाता है (पिछले साल करीब 60 लाख टन)। उर्वरक का 30% आयात होता है, जिसमें 40% पश्चिम एशिया से। एविएशन में भारतीय एयरलाइंस की 10% उड़ानें इस क्षेत्र से गुजरती हैं, जिससे ईंधन लागत बढ़ सकती है।
LPG का दो-तिहाई आयात पश्चिम एशिया से है, लेकिन केवल 10% औद्योगिक उपयोग में होता है, इसलिए उद्योगों पर असर सीमित रह सकता है। CRISIL का मानना है कि फिलहाल मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां तुरंत असर झेल सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक तनाव बने रहने पर जोखिम बढ़ेगा।



