
पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच संबंधों में हालिया घटनाक्रम से तनाव साफ दिख रहा है। UAE, जो पहले पाकिस्तान को बड़ी वित्तीय मदद देता रहा है, अब भारत के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है। पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ करीबी और ‘इस्लामिक नाटो’ जैसी योजनाओं ने UAE को असहज किया है।
हाल ही में UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 19 जनवरी 2026 को भारत का आश्चर्यजनक दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में रक्षा साझेदारी के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और स्पेस में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, साथ ही LNG सप्लाई और अन्य समझौते किए गए।
इसके ठीक बाद UAE ने पाकिस्तान के साथ इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालन की डील रद्द कर दी, जो अगस्त 2025 से चर्चा में थी। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने लोकल पार्टनर चुनने में देरी और रुचि खोने का हवाला दिया, लेकिन timing से यह भारत के साथ बढ़ते रिश्तों और सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस पैक्ट से जुड़ा माना जा रहा है।
इसके बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 26 जनवरी 2026 को UAE का चार दिवसीय दौरा किया। UAE न्याय मंत्री ने उनका स्वागत किया और दोनों राष्ट्रपतियों ने व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। पाकिस्तान CEPA जैसे आर्थिक समझौतों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन UAE का फोकस अब भारत पर ज्यादा है।
यह बदलाव खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति में बड़ा शिफ्ट दिखाता है, जहां UAE भारत के साथ मजबूत हो रहा है।




