बिजली उपभोक्ता परेशान, बिजली कर्मी मस्त

  • रानीपुर विद्युत् उपकेन्द्र का वर्षो नहीं बदला जा रहा फीटर, व् तार, उपभोक्ता परेशान        

download (29)मऊ: रानीपुर विद्युत उपकेंद्र में लगी आग।  विभाग की लापरवाही के चलते पूर्वी क्षेत्र में उत्तरी फीडर जोड़कर वर्षों से दी जा रही है सप्लाई । वर्षों से उत्तरी फीटर की टाली जली हुई है। जिसको लेकर ग्रामीण अनशन पर भी  बैठे थे । लेकिन कई दिन बैठने  के बाद विभाग द्वारा आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह भीतर टाली बना दिया जाएगा एवं मऊ से रानीपुर का तार तीन महीना में बदल दिया जायेगा। लेकिन तार और फीटर तो नहीं बदला गया लेकिन आज उत्तरी फीटर पर वर्षो से दी जा रही सप्लाई के कारणवस 12:00 बजे दिन में आग लगने फीटर जल गया। इस तेज गर्मी में लोग एक तरफ मर वही दूसरी तरफ विजली विभाग केवल लूट खसोट में व्यस्त रहता है। आपको बता दे कि विजली विभाग द्वारा प्रति वर्ष विजली सब स्टेशनों के तारो को ठीक करने के लिए टेंडर होता है। लेकिन विजली विभाग के ठेकेदार व् विजली विभाग के अधिकारी कागजी कोटा पूर्ती करते हुए सारे रुपये हजम कर जाते है। और भुगतना उपभोक्ताओं को पड़ता है। क्योकि अधिकारियो के आवासों की विजली तो कटती नहीं है। विजली कटौती होती है तो केवल उपभोक्ताओं की विजली का बिल जमा करते है। यही मऊ जनपद के सभी विजली कर्मी निशुल्क विजली का उपभोग भी करते है। जबकी अब शासनादेश मव भी परिवर्तन हो गया है ।कि अब विजली कर्मियो को भी बिजली का बिल जमा करना होगा। लेकिन क्यों ये विजली कर्मी बिजली कर्मी बिल नही जमा करते है। इन बिजली कर्मियो के अवैध   कमाई का का यदि पता लगाना है तो केवल इनके निजी आवास पर चले जाईये सारी हकीकत पता चल जायेगी । मानदेय पर नौकरी करने वाले बाबु के माकान भी ऐसे मिलेगे जैसे किसी IAS आफिसर का मकान है। आखिर इतना अचूक पैसा आता कहा से है? जी हां ये हमारे आपके पैसे है जो बिजली बिभाग को सरकार देती तो जरूर है बिजली की ब्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये लेकिन बिजली की ब्यवस्था तो नहीं सही की जाती बल्कि बिजली के एक कनेक्शन से लेकर बिजली के बिल में भी धांधली करके आप से अवैध रूपये लिये जाते है। इन विजली कर्मियो के प्रति जवाबदेह कौन है । इस विषय में सभी आला अधिकारी चुप्पी साध रखे है। यदि इनके अवैध धंधे को रोकना है तो जिस काम के लिए जो विजली कर्मी पैसा मागता तो पैसे तो दे दीजिये    लेकिन उसके बिल की एक कॉपी जरूर मांगिये । और यदि नहीं देते है तो इसकी शिकायत जिलाधिकारी से करे। और उसकी एक प्रति मीडिया में भी दे ताकि इनकी काली कमाई पर कुछ हद तक अंकुश लग सके। जैसा कि अभी जल्द ही रानीपुर जेई के ऊपर  अवैध रूपये लेने  का आरोप लगा था।

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