होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है…

एजेन्सी/l_Homeopathic-Medicine-1460196069एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है…

होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है। इसके अलावा मरीज द्वारा रोग के बारे में सही जानकारी न देना उचित दवा के चयन में बाधा पैदा करती है जिससे समस्या का समाधान पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज को उस दवा से कुछ समय तक के लिए तो राहत मिल जाती है लेकिन बाद में यह दवा शरीर पर दुष्प्रभाव छोडऩे लगती है। इस लापरवाही से आमतौर पर होने वाले रोगों का इलाज शुरुआती अवस्था में नहीं हो पाता और वे क्रॉनिक रूप ले लेते हैं व असाध्य रोग बन जाते हैं। मरीज को चाहिए कि वह डॉक्टर को रोग की हिस्ट्री, अपना स्वभाव और आदतों के बारे में पूर्ण रूप से बताए ताकि एक्यूट (अचानक होने वाले रोग जैसे खांसी, बुखार) रोग क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाले रोग जैसे अस्थमा, टीबी) न बने। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकतर मामलों में एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। आमतौर पर होने वाली परेशानियों को छोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि एक रोग दूसरी बीमारी का कारण बन सकता है। जानते हैं इनके बारे में।

बुखार

यह शरीर का नेचुरल प्यूरिफायर है जिससे शरीर में मौजूद विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं। 102 डिग्री तक के बुखार को ठंडी पट्टी रखकर, आराम करके या खाने में परहेज कर ठीक कर सकते हैं लेकिन उचित दवा न लेने से परेशानी बढ़कर असाध्य रोगों को जन्म देती हैं। जैसे बच्चों में इसके लिए सही दवा न दी जाए तो निमोनिया, सांस संबंधी परेशानियों हो सकती हैं। इसके अलावा कई बार दिमाग में बुखार के पहुंचने से बच्चे को दौरे भी आ सकते हैं।

इलाज

डॉक्टर को सभी लक्षण पूर्ण रूप से बताएं ताकि वे उसी आधार पर सही दवा का चयन कर रोग को शुरुआती स्टेज में ही दूर कर सके। आर्सेनिक (हल्के बुखार के साथ पानी की प्यास ज्यादा व पसीना आने पर), एकोनाइट (तेज बुखार के साथ पानी की प्यास, शरीर में सूखापन), बेलाडोना (तेज बुखार के कारण चेहरा लाल व सिरदर्द), चाइना (गैस बनने व पेट खराब होकर बुखार) आदि दवा से इलाज करते हैं। 

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