Thursday , February 23 2017

‘10 लाख का सूट पहनने वालों के हाथ में चरखा, दिल में नाथूराम’

हाथ में चरखामुंबई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के डायरी-कैलेंडर विवाद के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। तुषार ने ट्वीट कर कहा, “प्रधानमंत्री पॉलीवस्त्रों के प्रतीक हैं जबकि बापू ने अपने बकिंघम पैलेस के दौरे के दौरान खादी पहनी थी न कि 10 लाख रुपये का सूट।”

उन्होंने केवीआईसी को बंद करने की मांग करते हुए कहा, “हाथ में चरखा, दिल में नाथूराम। टीवी पर ईंट का जवाब पत्थर से देने में कोई बुराई नहीं है।”

तुषार गांधी अपने ट्वीट में बापू की 1931 की ब्रिटेन यात्रा का हवाला दे रहे थे जब उन्होंने ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी से मुलाकात की थी उन्होंने खादी की धोती और शॉल पहन रखा था। मोदी ने इसकी तुलना में भारत में राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा के दौरान विवादास्पद 10 लाख रुपये का सूट पहना था।

तुषार ने इससे पहले ट्वीट कर कहा था, “तेरा चरखा ले गया चोर, सुन ले ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम। पहले, 200 रुपये के नोट पर बापू की तस्वीर गायब हो गई, अब वह केवीआईसी की डायरी और कैलेंडर से नदारद हैं। उनकी वजह 10 लाख रुपये का सूट पहनने वाले प्यारे प्रधानमंत्री की तस्वीर लगी है।”

मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम ने केवीआईसी के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह राष्ट्रपिता का अपमान है। निरूपम ने शुक्रवार देर रात जारी बयान में कहा, “हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि इन कैलेंडरों को तुरंत वापस लिया गया।”

महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने इसे स्वयं की पीठ थपथपाने वाला बताया और केवीआईसी के 2017 के कैलेंडर और डायरी से गांधी की जगह मोदी की तस्वीर लगाने के लिए माफी की मांग की।

चव्हाण ने शुक्रवार रात जारी बयान में कहा, “महात्मा गांधी ने देश को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था जिसे लेकर 1956 में केवीआईसी का गठन किया गया। हालांकि, इस सरकार ने आत्म प्रशंसा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जबकि यह एक गलत कदम है।” चव्हाण ने कहा, “आप महात्मा गांधी को देश के लोगों के दिल से नहीं निकालल सकते।”

गौरतलब है कि केवीआईसी के 2017 के डायरी और कैलेंडर पर गांधी की जगह मोदी की तस्वीर छापे जाने पर सरकार और केवीआईसी को तमाम राजनीतिक दलों के रोष का सामना करना पड़ रहा है।

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