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कास्त्रो ने आधुनिक राजनीतिक साहित्य पर छोड़ी अमिट छाप

राजनीतिक साहित्यहवाना। क्यूबाई क्रांति के नेता और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो समसामयिक राजनीतिक साहित्य पर अमिट छाप छोड़ गए हैं। यह जानकारी मीडिया रपटों में रविवार को कही गई है। 90 साल की आयु में शुक्रवार को कास्त्रो का निधन हो गया।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अत्यधिक पढ़ने वाले कास्त्रो कोलंबियाई लेखक ग्रैब्रियल ग्रेसिया मार्केज के घनिष्ठ मित्र थे। मार्केज ने कहा कि बौद्धिक मित्रता ने उन्हें जोड़ा और वे अक्सर साहित्य पर चर्चा करते थे।

कास्त्रो ने एक बार खुद को एक निराश पत्रकार कहा था और साल 2008 में सत्ता छोड़ने के बाद से सरकारी मीडिया के लिए अक्सर अपना लेख लिखते थे।

साल 2007 में ‘रिफ्लेक्शन ऑफ कॉमरेड फिदेल’ शीर्षक से अपना स्तंभ शुरू कर पूर्व राष्ट्रपति हमेशा राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। अंतर्राष्ट्रीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर उनके करीब 400 लेख प्रकाशित हुए।

हालांकि कास्त्रो ने कई पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें ‘वन हंड्रेड ऑवर्स विद कास्त्रो’ भी शामिल है। यह फ्रांसीसी पत्रकार इग्नेसियो रमोनेट को साल 2006 में उनके जीवन पर दिया गया एक लंबा साक्षात्कार है।

नवम्बर, 2008 में कास्त्रो की पुस्तक ‘पीस इन कोलंबिया’ प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने पर्दे के पीछे विभिन्न कोलंबियाई सरकारों और क्यूबा के बीच हो रही पहल और कोलंबिया की शांति प्रक्रिया में हवाना की भागीदारी को उजागर किया।

साल 2010 में क्यूबाई नेता की पुस्तक ‘द स्ट्रेटेजिक विक्टरी’ प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने 1958 के ग्रीष्मकाल में सिएरा मेस्त्रा में उन्हें लगे शुरुआती झटके और फुलजेनसियो बतिस्ता के निरंकुश शासन के खिलाफ लगातार संघर्ष को लिपिबद्ध किया। इसी साल उनकी पुस्तक ‘द स्ट्रेटेजिक काउंटरऑफेंसिव’ भी प्रकाशित हुई।

इसके बाद साल 2012 में उनकी पुस्तक ‘गुरिल्ला ऑफ टाइम’ प्रकाशित हुई, जो क्यूबाई पत्रकार कटिउश्का ब्लैंको को उनके जीवन पर दिया गया एक और लंबा साक्षात्कार है। करीब 1000 पृष्ठों की इस पुस्तक के दो अंक हैं।

सपेन के प्रवासी के पुत्र और होलगुइन प्रांत के बीरान गांव में जन्मे क्यूबा के किसान कास्त्रो 20वीं सदी की प्रमुख हस्ती बन गए।

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