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कैशलेस अर्थव्यवस्था की पहल में आईआरसीटीसी भी शामिल

कैशलेस लेनदेन को बढ़ावानई दिल्ली| कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कोरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) ने अपने परिचालन के डिजिटलीकरण के लिए खासतौर से ई-कैटरिंग, ई-टिकटिंग और पर्यटन खंड में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने का फैसला किया है। आईआरसीटीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. एके मानोचा ने बताया, “भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री की नोटबंदी की नवीनतम पहल से इस प्रक्रिया को गति मिलेगी। हमने सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अपने कई खंडों को पहले ही डिजिटल बना लिया है और हम आगे प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके और अधिक आक्रामक तरीके से अपने यात्रियों के अनुकूल उपायों को बढ़ावा देंगे।”

कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा

हाल ही में आईआरसीटीसी ने ई-कैटरिंग सेवा ‘फू़ड ऑन ट्रैक’ की शुरुआत की है जिसे बड़ी सफलता मिली है। क्योंकि इससे रेल यात्री अपनी पसंद का खाना ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री भोजन का भुगतान ऑनलाइन करते हैं और उन्हें नकदी लेकर चलने की जरूरत नहीं है।

इस सेवा के लिए आईआरसीटीसी ने डोमिनोज, हल्दीराम, केएफसी और सरवन भवन जैसे लोकप्रिय रेस्तरांओं से साझेदारी की है, ताकि यात्री अपनी पसंद का भोजन खा सकें। यही नहीं यात्रियों को क्षेत्रीय भोजन मुहैया कराने के लिए आईआरसीटीसी ने नाबार्ड के सहयोग से महिला स्वयंसहायता समूहों से हाथ मिलाया है। कोंकण क्षेत्र में एमएएचइआर, एमएवीआईएम, ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर रिसर्च फाउंडेशन जैसी महिला स्वयंसहायता समूह यात्रियों को ट्रेन की सीट पर स्वादिष्ट कोंकणी भोजन परोसती हैं।

डॉ. मानोचा ने कहा, “ग्रामीण आबादी को ई-कैटरिंग के माध्यम से कैशलेस लेनदेने से जोड़ने के लिए यह आईआरसीटीसी की महत्वपूर्ण पहल है। इसमें समूह की महिलाओं को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। कोंकण रेलवे ने यह पायलट परियोजना शुरू की है।”

मार्गन स्टेनले की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का इंटरनेट आधारित बाजार फिलहाल 16 अरब डॉलर का है जो साल 2020 तक 159 अरब डॉलर का हो जाएगा, जोकि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ई-कॉमर्स अर्थव्यवस्था है।

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