स्कूल…आओ, जेब ढीली कर जाओ

school-books-1459481903एजेन्सी/अनेक स्कूल अभिभावकों को मोबाइल फोन पर सन्देश भेजकर बुला रहे हैं, आओ और किताबें ले जाओ। समूचे राजस्थान प्रदेश में 40,757 निजी स्कूल हैं तो केवल जयपुर में 6,630 स्कूल हैं।

अभिभावक परेशान, सरकार मौन

स्कूलों की मनमानी से अभिभावक खासे परेशान हैं, लेकिन सरकार मौन है। फीस वृद्धि पर लगाम तो दूर, मुनाफाखोरी तक  पर सरकार लगाम नहीं कस पा रही है।

इस मनमानी पर रोक के लिए वर्ष 2013 में राजस्थान स्कूल्स (रेग्यूलेशन ऑफ कलेक्शन ऑफ फीस) एक्ट 2013 लागू हुआ था। न्यायालय के निर्देश पर बने इस एक्ट के तहत राज्य स्तरीय फीस निर्धारण समिति बन चुकी है। हालांकि एक्ट के खिलाफ स्कूल संचालक अदालत चले गए, जहां मामला चल रहा है। फिलहाल स्कूलों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के आदेश हैं, लेकिन मनमानी पर लगाम का जिमा शिक्षा विााग का है।

यूं हो रही मनमानी

ज्यादातर स्कूलों ने अपने स्तर पर अलग प्रकाशक तय कर रखे हैं जबकि एनसीईआरटी की पुस्तकें बहुत कम दाम पर मिल रही हैं। एनसीईआरटी का पूरा सैट 1000 से 1200 रुपए तक मिल रहा है जबकि स्कूलों से यह सैट 6 से 8 हजार रुपए तक पड़ रहा है।

स्कूलों में खुली अस्थाई दुकानों से किताबें उतने में ही दी जा रही हैं, जितनी एमआरपी उस पर अंकित है। जबकि उसी प्रकाशक की किताब बाजार में इससे सस्ती मिल रही है।

कई स्कूलों में पोशाक का मार्च 2 से 4 हजार तक अतिरिक्त पड़ रहा है। नामचीन कपनियों के जूते और यूनिफॉर्म भी कई स्कूल में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्कूलों ने दुकानें तय कर बता दी हैं। गणवेश भी एक से अधिक है। इनमें भी मनमानी हो रही है।

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