साधुओं के पांडाल में पहुंच रहे श्रद्धालु, मन और तन दोनों हो रहे शांत

singhstha-2016_571f55cf0b7dbएजेंसी/ उज्जैन। सिंहस्थ 2016 के तहत इन दिनों मध्यप्रदेश के उज्जैन में धर्म की गंगा बह रही है। एक ओर जहां विभिन्न अखाड़ों के साधु अपनी योग क्रियाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ साधु धुनि रमाए हुए रहते हैं। इन साधुओं को देखकर श्रद्धालु आश्चर्य और श्रद्धा से भर जाते हैं। भरी दोपहरी में कोई साधु रेत से स्नान करते हैं तो कोई साधु धुनि रमाते हैं। इनके आसपास कंडों का धुंआ होता है और ये ईश्वर के ध्यान में लगे होते हैं।

कुछ साधु तो ऐसे हैं जो कि अपनी योगिक क्रियाओं को करने के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भूख और प्यास को मिटाने में लगे होते हैं। इन साधुओं को इसी में आनंद मिलता है। ये साधु बड़ी आत्मीयता से अपने पांडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की आवभगत करते हैं। साधुओं के शिष्य श्रद्धालुओं का पानी देते हैं। इनके पांडालों के समीप इनके द्वारा लगाए गए अन्नक्षेत्रों में यदि भोजन – प्रसादी का समय हो तो वे आग्रह कर लोगों को भोजन करने के लिए कहते हैं।

ये साधु स्वयं ही परोसगारी भी करते हैं। इनके हाथ से परोसा गया भोजन कर श्रद्धालुओं की आत्मा तृप्त हो जाती है। सिंहस्थ 2016 में जहां तन की क्षुधा शांत होती है वहीं श्रद्धालुओं का मन यहां के पांडालों में आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा और श्री राम चरित मानस की कथा प्रसंग से शांत हो जाता है।

इन दिनों लोकप्रिय संत मोरारी बापू भूखीमाता क्षेत्र स्थित श्री प्रभुप्रेमी संघ के पांडाल में श्री राम चरित मानस के शिव प्रसंग का उल्लेख कर रहे हैं तो दूसरी ओर संत श्री रमेश भाई ओझा के मुखारविंद से श्रीमदभागवत का ज्ञान लोगों को मिल रहा है। इससे लोगों के मन की क्षुधा शांत हो रही है।

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