संगम नगरी में दिखा अनोखा नजारा, किन्नर साधुओं का भारी जमावड़ा बना आकर्षण का केंद्र

संगम नगरी प्रयागराज में इस बार का कुंभ कई बातों को लेकर महत्वपूर्ण है। त्रिवेणी में पहली बार किन्नर साधुओं का अनोखा संगम देखने को मिला।

ऐसा पहली बार हुआ, जब कुंभ के दौरान किन्नर अखाड़ा के संतों ने अपना इतिहास बदलते हुए शाही स्नान किया।

बता दें कि कुंभ के दौरान जूना अखाड़ा के संतों से हुई बातचीत के बाद किन्नर अखाड़ा का उसमें विलय हो गया।

किन्नर साधुओं का भारी जमावड़ा

जिसके बाद किन्नर अखाड़ा के संतों ने जूना अखाड़ा के साथ मिलकर कुंभ में शाही स्नान किया।

आज हम आपको दिखा रहा हैं कि किन्नर अखाड़ा के सदस्य किस तरह से शाही स्नान में शामिल हुए।

इस तस्वीर में किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान जुलूस में अपने समुदाय के लोगों के साथ रथ पर सवार होकर शाही स्नान के लिए निकल रही हैं।

15 जनवरी, 2019 को ली गई इस तस्वीर में, किन्नर अखाड़ा के अनुयायी एक जुलूस में रथ पर सवार होकर शाही स्नान के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

बता दें कि दशकों तक लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपने ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज के बाकी हिस्सों के साथ रखने के लिए भारत के कानूनों और मान्यताओं का सामना किया है।

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15 जनवरी को उन्होंने त्रिवेणी में शाही स्नान करके अपना इतिहास बदल दिया।

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, किन्नर अखाड़ा के अन्य सदस्यों के साथ रथ पर सवार होकर संगम की ओर जा रही हैं।

त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक किन्नर अखाड़ा के संत सिर्फ त्रिकाल संध्या स्नान करते थे। किन्नर अखाड़ा में त्रिकाल संध्या स्नान का विशेष महत्व है।

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