मोदी सरकार, काम नहीं तो नौकरी नहीं का फार्मूला लागू करेगी

download (87)एजेन्सी/नई दिल्ली।

केन्द्र में पदस्थ होने के बाद काम न करने के बाद भी सेवानिवृत होने त​क नौकरी पक्की मान कर चल रहे ब्यूरोक्रेट्स को मोदी सरकार ने बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला किया है। 

सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समझाने और चेतावनी देने के बाद भी कामकाज को गंभीरता से न लेने वाले अधिकारियों को बर्खास्त करने का कदम उठाने की सलाह दी है। 

पीएमओ ने कहा है कि विभाग एेसे नाकारा और निकम्मे बाबूओं से छुटकारा पाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिग के बुनियादी कानून का इस्तेमाल कर नौ​करी से सीधे बर्खास्त करने की कार्यवाही से भी हिचके नहीं। 

यह कानून सरकार को उस कर्मचारी के प्रदर्शन का आकलन करने का अधिकार देता है, जिसकी आयु 50 वर्ष की हो या जिसने 35 वर्ष की नौकरी पूरी कर ली हो। सरकार इस कानून का इस्तेमाल कर काम न करने वाले अधिकारियों को यह संदेश देना चाहती है कि काम से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और बेहतर प्रदर्शन न करने पर तत्काल बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। 

अक्सर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होने पर ही नौकरी से निकाला जाता था, लेकिन खराब प्रदर्शन को आधार मानकर नौकरी से निकालने की शुरुआत मोदी सरकार करने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद सरकार ने कुछ दिन पूर्व कमिश्नर स्तर के दो कस्टम और एक्साइज के अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।

तबादला नहीं घर बैठाने की प्रथा शुरू हो

सूत्र बताते है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपनी समीक्षा बैठक के दौरान साफ कहा है कि कुछ ब्यूरोक्रेट्स मन लगाकर काम नहीं कर रहे हैं और विभाग पर सिर्फ बोझ बन गए हैं, जिसके कारण सरकार की योजनाएं ठीक ढंग से जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच रही हैं, ऐसे अधिकारियों के लिए तबादला कोई हल नहीं है। 

ऐसे अधिकारी जिस भी विभाग में जाएंगे, काम नहीं करेंगे और उस विभाग के प्रदर्शन को गिराने का काम करेंगे। इससे बेहतर है कि एेसे नकारा अधिकारियों को सीधे बर्खास्त किया जाएं।

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