मोदी के इस जगह पर जाते ही बन गया इतिहास, जुड़ी है शौर्य की गाथा

हमारे देश के प्रधानमंत्री जहाँ भी जाते है उनके चाहने वालो का एक कारवां लग जाता है। अभी रविवार को प्रधानमंत्री मोदी जी अंडमान निकोबार पहुंचे और वहां पर उस जेल में भी गए जिसे काला पानी भी कहा जाता है और वह उस कोठरी में भी गए जहाँ पर वीर सावरकर को भी रखा गया था।

लेकिन क्या आपको पता है यह जेल अन्दर से कैसी होती है। इस जेल में बहुत अलग अलग प्रकार की यातनाये भी दी जाती है। यह पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल के नाम से जानी जाती है, इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को यातनाये देने के लिए भी रखा जाता था।

अंग्रेजो ने इस जेल का निर्माण 1857 की क्रान्ति के बाद करवाया था। और अंग्रेजो के शासन के खिलाफ आवाज उठाता था। उसे इस जेल में रखा जाता था। इसीलिए इस जेल का निर्माण भारत से अलग अंडमान में कराया गया था।

जब अंग्रेजो के खिलाफ कोई भी आवाज उठाता था तब उसे इस जेल में भेज दिया जाता था। उसे ही काला पानी की सजा कहा जाता था। और काला पानी की सजा कहने का मुख्य कारन यही था कि यह भारत की मुख्य भूमि से हजारी किलोमीटर दूर था। राजधानी पोर्टब्लेयर में जिस जगह यह जेल बनी हुई है उसके चारो ओर पानी ही पानी भरा रहता था। यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के अन्तर्गत आता है।

इस जेल में 696 सेल बनाई गई थी। कैदी चाहकर भी इस जेल से बाहर नहीं जा सकता था। यहाँ पर क्रांतिकारियों पर बहुत ही जुल्म ढाया जाता था। और उनसे कोल्हू से तेल पेरने का काम करवाया जाता था। हर कैदी को नारियल और सरसों पेरना होता था और ऐसा न करने पर उन्हें बहुत पीटा जाता था। और बेडियो में भी जकड दिया जाता था।

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बहुत से कैदियों की तो मौत ही हो जाती थी। दोस्तों इस जेल में बटुकेश्वर दत्त,वीर सावरकर,बाबू राव सावरकर,आदि क्रांतिकारियों ने सजा काटी है।

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