भारी बारिश और बाढ़ ने मचाई नौ जिलों के 394 से ज्यादा गांवों में तबाही, राहत-बचाव में जुटी सेना

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी-बारिश और बाढ़ की वजह से हालात बेहद खराब है। बाढ़ ने राज्य के नौ जिलों के 394 से ज्यादा गांवों में तबाही मचाई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी को बाढ़ की स्थिति की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने राज्य में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। बता दें कि अब तक सात हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। छिंदवाड़ा में बाढ़ में फंसे 5 लोगों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। होशंगाबाद, सीहोर और रायसेन जिले के कई गांव बाढ़ में घिरे हैं। यहां राहत कार्यो के लिए सेना को लगाया गया है।

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-भारतीय वायु सेना ने सीहोर में सोमालवाड़ा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को रेस्क्यू किया। बालाघाट जिले के एक गांव में फंसे तीन लोगों को भी एयरलिफ्ट कर लिया गया है।

– हमने बांध से भी पानी का डिस्चार्ज कम किया है, लेकिन अभी भी बारिश की संभावना है। मेरा लोगों से आग्रह है कि प्रशासन जिन गांवों से निकलने का आग्रह कर रहा है वहां जिद न करें। यथासंभव हम राहत शिविरों में सारी व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

सीएम ने घर पर बनाया कंट्रोल रूम

इससे पहले मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा किया। उन्होंने कहा कि मैंने अपने कार्यालय को कंट्रोल रूम बना लिया है। रातभर बैठकर राहत कार्यो की निगरानी करूंगा। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे बाढ़ से किसानों की फसल को हुए नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय दल भेजा जाए। प्रदेश के बड़े हिस्से में भारी बारिश के कारण खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं।

सेना से पांच हेलिकॉप्टर मांगे

अपर मुख्य सचिव (गृह) राजेश राजौरा ने बताया कि शासन ने सेना से कुल पांच हेलिकॉप्टर मांगे हैं, जबकि सेना की चार टुकड़ियां सीहोर, दो रायसेन और एक बाबई होशंगाबाद में राहत कार्यो में लगाई जाएंगी।

होशंगाबाद के 48 गांवों व बस्तियों में 10 फीट पानी

होशंगाबाद में नर्मदा में पानी बढ़ने से एक दर्जन निचली बस्तियों में पानी भर गया। सात साल बाद सेठानी घाट से पानी शहर की तरफ आ गया। मालाखेड़ी और बांद्राभान क्षेत्र के 48 गांवों और बस्तियों में 10 फीट तक पानी भर गया। यहां पहुंची एनडीआरआफ ने बाढ़ में फंसे 50 लोगों को निकाला। होशंगाबाद से पिपरिया-हरदा, सिवनी-मालवा, बैतूल का सड़क मार्ग से संपर्क कट गया।

इन जिलों में हाल बेहाल

रायसेन

जिले के बरेली शहर में बारना बांध का पानी घुस गया। बाढ़ में फंसे 500 लोगों को प्रशासन ने नाव से निकाला। बरेली से जयपुर-जबलपुर, भोपाल-सागर, गाडरवारा-बाड़ी सड़क संपर्क कटा रहा।

विदिशा

जिले में बारिश के कारण विदिशा-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है। वहीं जिला मुख्यालय से अधिकांश गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है।

सीहोर

नसरल्लागंज-इंदौर और रेहटी सड़क मार्ग बंद रहा। अंबा में बाढ़ की चपेट में आए 52 लोगों ने प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जिले के तकरीबन 50 गांवों का संपर्क टूट गया।

बैतूल

शाहपुर के पास माचना नदी के पुल पर पानी होने से कल सुबह छह बजे से ही भोपाल-नागपुर राजमार्ग–69 पर यातायात बंद है।

हरदा

शहर की चार निचली बस्तियों में पानी भरने से वहां के लोगों को सुरक्षित स्थान पर प्रशासन ने पहुंचाया है। हंडिया में नर्मदा नदी खतरे के निशान से एक फीट ऊपर बह रही थी।

शिवपुरी-दतिया

पिछले दो दिनों में बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है। इससे टमाटर, सोयाबीन, मूंगफली व उड़द-मूंग की फसल प्रभावित हुई है।

छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा में पांच लोगों को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। दो दिन से टापू बने जिले में एनडीआरएफ की टीम ने घोघरा में फंसे युवक को उसके श्वान के साथ वायुसेना के हेलिकॉप्टर से निकाला।

बरगी के सभी गेट खोलेज

बलपुर में 24 घंटे के दौरान तीन इंच बारिश हुई जिससे बिलहरी में चैतन्य सिटी में पानी भर गया और यहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बरगी बांध का जलस्तर ब़़ढने से सभी 17 गेट 2.59 मीटर तक खोले गए। नरसिंहपुर व होशंगाबाद जिले में अलर्ट भेजा गया है।

कटनी में कच्ची दीवार ढही, चार बच्चों की मौत

कटनी जिले के उमरियापान थानांतर्गत ग्राम पंचायत बम्हनी के गांव बनहरा में शनिवार दोपहर बाउंड्रीवाल की एक कच्ची दीवार बच्चों के ऊपर ढह गई। मलबे में दबकर चार बच्चों की मौत हो गई। दो दिन से हो रही बारिश के कारण दीवार में नमी थी। हालांकि जिस समय हादसा हुआ, उस समय बारिश नहीं हो रही थी। मृत बच्चों में भाई–बहन भी शामिल हैं।

एक और संकट आया शिवराज

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के नाम दिए संदेश में कहा कि कोरोना संकट के बीच अतिवषर्षा का एक और संकट आया है। होशंगाबाद में नर्मदा नदी खतरे के निशाने से काफी ऊपर बह रही है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। राज्य आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय हैं। सेना को सतर्क कर दिया है। राज्य और जिले के कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करेंगे। डायल 100 और 1079 पर आपात स्थिति में संपर्क किया जा सकता है। भारी बारिश व बाढ़ से कोई जनहानि न हो, यह सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री शनिवार सुबह विदिशा, सीहोर और सागर फसलों को हुए नुकसान का दौरा करने जाने वाले थे, लेकिन भारी बारिश की स्थिति को देखते हुए उन्होंने कार्य निरस्त कर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने कहा कि भारी बारिश और बाढ़ से कोई जनहानि न हो, यह सुनिश्चित करें।

औसत से 10 फीसद ज्यादा बारिश हुई

गहरे कम दबाव के क्षेत्र से प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बरसात का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार को सुबह 8:30 बजे तक प्रदेश में औसत 815.2 मिमी. बरसात हो चुकी है, जो सामान्य (743.0 मिमी.) से 10 फीसद अधिक है।

इसलिए हुई भारी बरसात

मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ गहरा कम दबाव का क्षेत्र शनिवार को टीकमग़़ढ में पहुंच गया। यह सिस्टम दो दिन तक सीधी के पास स्थिर था। इसकी वजह से पूर्वी मप्र में बारिश का सिलसिला जारी था। टीकमग़़ढ पहुंचने के साथ ही इसे अरब सागर से लगातार नमी मिलने का सिलसिला जारी है। इसलिए यह ऊर्जावान बना हुआ है।

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