फिर बहने लगी शिक्षा की बयार बस्तर में

education_57204c798b01aएजेंसी/ नक्सलियों के गढ़ बस्तर के बीजापुर जिले में लम्बे अर्से से सरकारी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है. खासतौर से शिक्षा विभाग की स्थिति काफी खराब है. शिक्षक सालों से स्कूल नहीं जाने के बाद भी वेतन ले रहे हैं. लेकिन बीजापुर के कलेक्टर यशवंत कुमार ने फरमान जारी कर दिया है कि जो शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाए. इस आदेश के बाद अब स्कूलों में शिक्षक पहुँचने लगे हैं और बस्तर में शिक्षा की बयार बहने लगी है.

के. रमेश सरकारी शिक्षक हैं. 6 साल से जबसे उनकी नौकरी लगी है वे स्कूल नहीं जा रहे हैं. जबकि 21 हजार मासिक वेतन बराबर ले रहे हैं.के. रमेश जैसे बस्तर में सैकड़ों शिक्षक हैं, जो झंडा शिक्षक के नाम से जाने जाते हैं. यानी केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी को स्कूल में झंडा फहराने जाते हैं. इनके द्वारा झंडा फहराने के बाद नक्सली उसे उतारकर काला झंडा फहरा देते हैं. यह सिलसिला सालों से चल रहा है.
लेकिन अब बीजापुर के कलेक्टर यशवंत कुमार ने पहली बार आदेश दिया कि जो शिक्षक स्कूल नहीं जाता हों उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाए. लेकिन शिक्षकों को एक मौका देने के सुझाव के बाद अब दो शिक्षकों को छोडकर बाकी सभी शिक्षक नियमित स्कूल जाने लगे हैं.

बीजापुर, बस्तर सम्भाग का सबसे संवेदनशील जिला है जहाँ नक्सलियों की सरकार चलती है. यहीं के गुन्डराजगुडा में के. रमेश का स्कूल है. के. रमेश ने बताया कि गाँव में बिजली –पानी नहीं है इसलिए वह स्कूल नहीं जाते थे.अब कलेक्टर के आदेश के बाद वहीँ रहते हैं. गाँव वालों ने ही झोपडी बनाकर दी है. बगल की झोपडी में स्कूल है जहाँ 33 बच्चों को पढाते हैं. स्कोल में मध्यान्न भोजन की व्यवस्था नहीं है.गाँव वालों की ही तरह वे भी पास की तालपेरू नदी से पानी लाकर पीते हैं. नक्सलियों से उन्हें कोई परेशानी नहीं है.इस सवाल पर कि क्या नक्सली पहले भी स्कूल आकर पढ़ाने का अनुरोध करते थे तो रमेश ने सकारात्मक जवाब दिया हाँ.

बीईओ बीएस नागेश कहते हैं कि हम अगली बैठक में उन शिक्षकों की नौकरी की समाप्ति का प्रस्ताव भेजने वाले हैं जो अब भी स्कूल नहीं जा रहे हैं.

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