प्रेग्नेंसी से जुड़े कुछ झूठ जिसे सभी मानते हैं सच, आइए जानते हैं पूरा सच

प्रेग्नेंसी किसी भी महिला की जिंदगी में सबसे ज्यादा खास पल होता है. इस दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को अलग-अलग लोगों से तरह-तरह की सलाह मिलती है. कुछ सलाह तो तार्किक होती हैं लेकिन कुछ केवल मिथकों पर आधारित होती है. पीढ़ी दर पीढ़ी प्रेग्नेंसी से जुड़े ये मिथक चलते रहते हैं. जानिए, प्रेग्नेंसी से जुड़े मिथकों के बारे में.

प्रेग्नेंसी

दो शरीर के हिसाब से खाएं-

कांग्रेस ऑफ ऑब्सटेट्रीशियन्स ऐंड गायकनोलॉजिस्ट (ACOG) के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण के विकास के लिए महिलाओं को केवल 300 ज्यादा कैलोरीज की जरूरत होती है.

सामान्य वजन वाली महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान 11-15 किलो वजन या फिर इससे कम वजन बढ़ना चाहिए. अगर किसी महिला का वजन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो सीजेरियन या जटिल वजाइनल डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है.

मां और बच्चे की अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए. प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों की कमी नहीं होनी चाहिए. डॉक्टरों की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लेने चाहिए.

पपीता खाने से गर्भपात का खतरा होता है-

ऐसी धारणा है कि पपीता खाने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है. जागरुक लोग भी इस पर यकीन कर लेते हैं.

जबकि सच्चाई यह है कि केवल कच्चा या अधपका पपीते में लैटेक्स की ज्यादा मात्रा होती है जिसमें लेबर वाले हार्मोन ऑक्सीटोसिन और प्रोस्टाग्लैडिन्स होते हैं.

जैसे ही पपीता पकता है, लैटेक्स की मात्रा घट जाती है और इसका सेवन सुरक्षित होता है. गर्भवती महिलाएं पूरी तरह से पका हुए पपीते का सेवन कर सकती है और इससे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. पपीता कब्ज और हार्टबर्न जैसी समस्याओं से भी निजात दिलाता है. उल्टियां और गैस की समस्या से भी पपीता छुटकारा दिलाता है जो प्रेग्नेंसी के दौरान आम हैं.

केसर से बच्चा गोरा होता है-

बच्चे का रंग जीन्स से निर्धारित होता है और इसके अलावा किसी भी चीज से रंग तय नहीं किया जा सकता है. कई लोग गर्भवती महिलाओं को केसर के सेवन की सलाह देते हैं ताकि बच्चा गोरा पैदा हो. हालांकि, यह केवल एक मिथक है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है.

घी के सेवन से डिलीवरी आसान होती है-

घी से ना तो डिलीवरी आसान होती है और ना ही यूटेरस की हीलिंग आसान होती है. घी संतृप्त वसा है और इसके ज्यादा सेवन से आपका वजन बढ़ेगा. कई लोगों को लगता है कि घी वजाइना को लुब्रिकेट करता है जिससे डिलीवरी आसान बन जाती है. हालांकि, इस बात में कोई सच्चाई नहीं है. हालांकि, घी में कई तरह के गुण होते हैं लेकिन असंृत्प वसा की मात्रा भी ज्यादा होती है इसलिए इसका सेवन नियंत्रित मात्रा में ही करना चाहिए. ज्यादा घी खआने से वजन बढ़ेगा और डिलीवरी मुश्किल हो जाएगी.

ग्रहण के दौरान कोई काम ना करें-

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है. कहा जाता है कि अगर ग्रहण के संपर्क में बच्चा आया तो वह किसी विकलांगता के साथ पैदा होगा. ग्रहण एक प्राकृतिक क्रिया है और इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. ग्रहण को नंगी आंखों से ना देखें, यह सलाह केवल गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं बल्कि हर किसी पर लागू होती है.

कैफीन से दूर रहें-

गर्भवती महिलाओं को कैफीन का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा हो सकता है. लेकिन इस तथ्य के कोई प्रमाण मौजूद नहीं है. इसलिए आप एक कप कॉफी का आनंद उठा सकती है लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दिन में 200mg से ज्यादा कैफीन ना लें.

संबंध ना बनाएं-

प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध ना बनाएं. इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है क्योंकि यह एम्नियोटिक सैक और मजबूत यूटेरिन मांसपेशियों से सुरक्षित होता है. एक मजबूत म्यूकस प्लग भी कर्विक्स को बंद किए रहता है. अगर आपकी लो रिस्क प्रेग्नेंसी है तो फिर मिसकैरिएज का खतरा नहीं होता. बस आपको किसी भी तरह के इन्फेक्शन से बचने की जरूरत है.

प्रेग्नेंसी में पीठ के बल ना सोएं-

प्रेग्नेंट महिलाओं को पीठ के बल नहीं सोना चाहिए. इसके अलावा हमेशा बाईं तरफ सोने की सलाह दी जाती है. ऐसी धारणा है कि पीठ के बल सोने से भ्रूण को ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक सकती है.

एक्सरसाइज से बच्चे को होगा नुकसान-

एक्सरसाइज से ना केवल मां बल्कि बच्चे पर भी अच्छा असर पड़ता है. डॉक्टर से परामर्श लेकर आप आराम से एक्सरसाइज कर सकती हैं. फिट रहने से आपका स्टैमिना मजबूत होता है और आफ बच्चे को जन्म देने के लिए ज्यादा अच्छे से तैयार हो पाती हैं.

प्रेग्नेंसी के दौरान हवाई सफर से बचें-

प्रेग्नेंसी के 36 सप्ताह होने से पहले तक महिलाओं के लिए हवाई सफर करना बिल्कुल सुरक्षित होता है. अगर आपकी प्रेग्नेंसी में कोई कॉम्प्लिकेशंस हैं तो आपके डॉक्टर आपको चेतावनी दे सकते हैं. प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान फ्लाइट में सफर करना सबसे सुरक्षित होता है. इस दौरान किसी इमरजेंसी के होने की आशंका सबसे कम होती है.

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