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जॉर्ज यो ने दिया नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद से इस्तीफा

नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयपटना| नोबेल पुरस्कार प्राप्त अमर्त्य सेन के बाद नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दूसरे चांसलर (कुलाधिपति) जॉर्ज यो ने अपने पद से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों के विषय में एक बयान में कहा है कि गवर्निग बोर्ड को भंग करने का आदेश तथा एक नए गवर्निग बॉडी का लाना न सिर्फ उनके लिए, बल्कि लोगों के लिए भी आश्चर्यजनक है।

यो ने विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती बोर्ड के सदस्यों को शुक्रवार को भेजे एक बयान में कहा, “जिन परिस्थितियों में नालंदा विश्वविद्यालय में बोर्ड का पुनर्गठन अचानक और तत्काल किया गया, वह विश्वविद्यालय के विकास के लिए परेशानी पैदा करने वाला तथा संभवत: नुकसानदायक है।”

उन्होंने कहा, “यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया। जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था, तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय को स्वायत्तता रहेगी। अब ऐसा प्रतीत नहीं होता।”

गौरतलब है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में 21 नवंबर को बोर्ड का पुनर्गठन किया था, जिससे प्रतिष्ठित संस्थान की संचालन इकाई का सरकार द्वारा पुनर्गठन किए जाने के बाद संस्थान के साथ सेन का संबंध समाप्त हो गया था।

यो ने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें गहरा दुख पहुंचा है, जिस कारण विजिटर को चांसलर के पद से उन्होंने त्यागपत्र भेज दिया है।

उन्होंने कुलपति को लेकर भी अपने बयान में नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुलपति की नियुक्ति लंबित रहने तक गोपा सबरवाल (जिनका कार्यकाल खत्म हो गया) को पद पर बरकरार रहना चाहिए था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि विश्वविद्यालय के गवर्निग बोर्ड में कोई खाली जगह न रहे।

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