
अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अच्छाई और बुराई करने वाले हजारों मिल जाएंगे। कोई उन्हें चायवाला मानकर पूजता है, तो कोई काला धन न लाने पर कोसता भी है। लेकिन मोदी की जिंदगी का एक पहलू ऐसा भी है, जो उनकी जीवटता और हार न मानने के जज्बे को दिखाता है। हाल में ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान मोदी ने इस पहलू का जिक्र भी किया था।
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बात साल 1975 की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक प्रस्ताव पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने हस्ताक्षर कर दिया। इसके बाद देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। आम लोगों से सभी अधिकार छीन लिए गए। यह वह दौर था, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगा दिया गया। मोदी संघ के कार्यकर्ता थे और इस मुश्किल दौर में उन्हें धोलका गांव के एक कमरे में खुद को छिपाना पड़ा। गिरफ्तारी से बचने के लिए नरेंद्र मोदी ने सिख वेश धारण कर लिया। वह भेष बदल-बदलकर संघ का प्रचार किया करते थे।
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साल 1977 तक मोदी भूमिगत रहे। धोलका गांव के जिस कमरे में मोदी रहते थे, वह महज 6 गुणा 11 साइज का था। भीषण गर्मी में छत तपती थी तो बारिश में कमरे में पानी भर जाया करता था। मोदी अपने लिए खाना भी यहीं पकाया करते थे। मोदी ने काफी मुश्किलें झेलते हुए यहां तीन साल का समय गुजारा। आपातकाल खत्म होते ही वे अहमदाबाद चले गए थे। बाद में इस कमरे की जगह शिव मंदिर बना दिया गया। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने इसी मंदिर में मोदी की जीत के लिए एक महायज्ञ किया था।
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