तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, फिर भी लोग बरत रहे लापरवाही

कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से फैल रहा है। फिर भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं। यह भी धारणा बन गई है कि  एक बार कोरोना संक्रमण हो गया तो फिर दोबारा नहीं होगा। शरीर में वायरस के खिलाफ एंडीबॉडीज तैयार हो जाएगी, पर ऐसा नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो बुजुर्ग व पहले से ही असाध्य बीमारी से ग्रस्त मरीजों को दोबारा भी संक्रमण हो सकता है। खासतौर से वे लोग जिनकी इम्युनिटी पावर कम है, इसलिए एहतियात की जरूरत है।  

बिना जांच के ही कोरोना मुक्त
नई गाइडलाइन ने संक्रमित मरीजों को संशय में डाल दिया है। संक्रमित के ठीक होने पर डिस्चार्ज के समय जांच नहीं की जा रही। होम आइसोलेशन में रखे लोगों को कोई लक्षण न होने पर 10 दिन बाद कोरोना मुक्त मान लिया जाता है। उन्हें केवल एक सप्ताह होम क्वारंटाइन और रहने की सलाह दी जाती है। लोग यह जान नहीं पाते कि वे संक्रमण मुक्त हुए या नहीं।  

सावधानी जरूरी: राठी हॉस्पिटल की चेस्ट फिजीशियन डॉ. रूबीना राठी ने बताया कि आमतौर पर कोरोना संक्रमितों को 28 दिन तक निगरानी की जरूरत है। इस अवधि में शरीर के अंदर वायरस के खिलाफ एंटी बॉडीज तैयार हो जाएंगी। जो लोग इंटरनल इम्युनिटी पर निर्भर हैं, उनके लिए खतरा बना रहता है। बुजुर्ग व बीपी-शुगर, सांस व अस्थमा से ग्रस्त मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत नहीं होती कि एंडीबॉडीज के भरोसे रहा जा सके। अभी तक ऐसा कोई शोध सामने नहीं आया, जिसमें कहा गया हो कि ठीक हुए मरीजों को फिर कोरोना संक्रमण नहीं होगा। खुद से ऐसी धारणा न बनाएं। पहले संक्रमित हो चुके मरीजों को तो और भी ज्यादा संभलने की जरूरत है। देशभर में अब ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जो ठीक होने के बाद संक्रमित हुए हैं।

ये बरते सावधानी
– डिस्चार्ज होने के बाद कोई भी परेशानी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
– स्वस्थ होने के बाद भी मास्क का सही तरीके से इस्तेमाल करें।  
– बीपी, शुगर आदि की नियमित दवा लेते रहें। हाथों को सैनिटाइज करते रहें।
– शारीरिक दूरी के नियम का पालन करें। अनावश्यक घर से न निकलें।
– न रिश्तेदारों को बुलाएं, न खुद जाएं। अस्पतालों में भीड़ न लगाएं।

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