डॉक्टर बना भगवान ! आस छोड़ चुके माता-पिता की 11 वर्षीय बच्ची की जान बचाकर दी नयी ज़िन्दगी !

रिपोर्ट – अंशुल

बदायूं : सरकार चाहे कितने भी प्रयास कर ले लेकिन जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर लापरवाही करने बाज नहीं आ रहे हैं | जिला अस्पताल में तैनात दो बालरोग विशेषज्ञ में से एक भी ऑन कॉल बच्ची को देखने नहीं आया और वार्ड में तैनात स्टाफ ने बरेली ले जाने की सलाह दे डाली|

बच्ची को लेकर उसके घर वाले जिला अस्पताल के गेट पर बैठकर रोने लगे तभी इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात ईएमओ ने बच्ची की हालत देखी तुरन्त इमरजेंसी में उपचार शुरू कर जान बचाई |

बदायूं जिले में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हो गईं हैं | कभी कोई डॉक्टर भगवान बनकर आता है तो कोई डॉक्टर हैवान बन जाता है | ऐसा ही मामला बदायूं के जिला अस्पताल का समान आया है |

यहां दो बालरोग विशेषज्ञ तैनात हैं, लेकिन दोनों में से एक भी डॉक्टर ऑनकॉल नहीं आते हैं | जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है|

दरअसल बदायूं सदर तहसील के मोहल्ला कबूलपुरा निवासी मुकेश की बेटी को दो दिन तक उपचार देने के बाद स्टाफ नर्स ने कह दिया अब बरेली ले जाओ |

तब तक बच्ची हालत यह हो गई कि बच्ची बरेली जाने की स्थिति में नहीं रही | यह हालत भी तब हुई जब ऑनकाल पर बच्चों वाले दो में से कोई एक भी डॉक्टर नहीं मिले |

 

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तो स्टाफ नर्स ने परिजनों से 11 वर्षीय बेटी नंदनी को बरेली ले जाने के लिए कह दिया | जबकि नंदनी को कोई ज्यादा बड़ी बीमारी नहीं थी | नंदनी को कई दिनों से बुखार आ रहा था और पेट दर्द हो रहा था | बस इस बीमारी के लिए बच्ची की हालत दो दिन में ऐसी कर दी कि वो ऑक्सीजन पर आ गई |

अब बरेली ले जाने के लिए अस्पताल इमरजेंसी के बाहर आसूं बहा रहे परिवार को देख ईएमओ डॉ. राजेश वर्मा बच्ची को इमरजेंसी में ले गए और बच्ची का तीन घंटे तक इमरजेंसी ओपीडी में ही रखकर उपचार किया |

बच्ची के शरीर में ब्लड की भारी कमी थी | डॉक्टर राजेश ने ब्लडबैंक से दो यूनिट ब्लड निशुल्क दिलवाया | डॉ. राजेश वर्मा की पांच घंटे की मेहनत ने बच्ची को नई जिंदगी दे दे दी |

बदायूं जिला अस्पताल में दो-दो बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं इसके बावजूद इसके दोनों डाक्टर जिला मुख्यालय से गायब रहते हैं | जिसमें एक डॉक्टर बरेली में रहते हैं तो दूसरे डाक्टर चंदौसी में रहकर ड्यूटी की खानापूर्ति करते हैं| मगर बच्चों के उपचार पर कोई गौर नहीं है |

मामले के सीएमएस का कहना है दोनों डॉक्टर एक साथ  अवकाश पर नहीं जा सकते और अवकाश पर गए भी हैं तो एक साथ दोनों डॉक्टर नहीं जा सकते | एक-एक करके छुट्टी पर जाना चाहिए | ऑनकॉल सेवाएं तो देना पड़ेगी | पूरे मामले में जो भी दोषी होगा सख्त कार्यवाही की जाएगी |

 

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