कोर्ट ने पूछा माहवारी से किस तरह भंग होती है पवित्रता

supreme-court1_570e0b2dc1325 (1)एजेंसी/ अदन : देशभर में महिलाओं के मंदिरों में प्रवेश को लेकर आवाज उठाई जा रही है। ऐसे में दक्षिण भारत के श्री सबरीमाला मंदिर में भी मांग की जा रही है कि महिलाओं के प्रवेश पर रोक न लगाई जाए। मगर यहां पर मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। उनका कहना था कि माहवारी के कारण खुद को लगातार 41 दिनों तक पवित्र नहीं रख सकती हैं। ऐसे में मंदिर प्रगबंधन ने 10 वर्ष से 50 वर्ष की आयुवर्ग की महिलाओं के इस अवधि में प्रवेश पर रोक लगा दी है।

मगर इस मामले में न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी गई। जब जनहित याचिका दायर की गई तो उस पर न्यायाधीश वी. गोपाला गौंडा और कुरियन जोसेफ के न्यायालय में बहस चली। मगर इस पर दोनों ही पक्षों के अपने-अपने तर्क थे। यह सवाल किया गया कि आखिर महावारी का पवित्रता के साथ क्या संबंध है। इस मामले में तर्क दिया गया कि यह किसी तरह के लिंग भेद के चलते नहीं हो रहा है यह तर्कसंगत है।

वेणुगोपाल ने कहा कि मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं पर रोक लगा दी गई है। यह रोक मंदिर में उनके प्रवेश पर नहीं है। उल्लेखनीय है कि मंदिर में प्रवेश से पहले किसी भी भक्त को प्रवेश् के लिए 41 दिन का व्रत रखना अनिवार्य होता है।

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