एएमयू के आरएम हॉल के गेट के पास हुई अंधाधुंध फायरिंग….

 एएमयू के आरएम हॉल के गेट के पास हुई अंधाधुंध फायरिंग तमंचों से नहीं हो सकती। राइफल व पिस्टलों के बिना ये संभव नहीं हैं। माना यही जा रहा है कि राइफल व पिस्टल से भी फायरिंग की गई। चश्मदीदों ने प्रॉक्टोरियल टीम का इसकी जानकारी भी दी है। मौके पर मिले खोखे भी इसकी तस्दीक कर सकते हैं। वैसे, पुलिस को मौके का निरीक्षण करने का मौका नहीं मिला जिससे पता चल सके कि घटना को कैसे अंजाम दिया गया। फायङ्क्षरग की इस घटना ने यूनिवर्सिटी की सुरक्षा पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। हथियारों से लैसे ये लोग कैंपस में प्रवेश कैसे पा गए? अगर बाहर से नहीं गए तो कैंपस में इन्हें हथियार किसने उपलब्ध कराए? कौन है जो हथियारबंद लोगों को पाले हुए है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इंतजामिया को तलाशने होंगे।


कोरोना संकट के चलते एएमयू में सन्नाटा है। न तो छात्र नजर आते हैं और न शिक्षक। ऑनलाइन ही पढ़ाई की जा रही है। यूं तो कैंपस खाली है लेकिन हॉस्टलों मे अभी कुछ छात्र रह रहे हैं। इनके लिए डाइनिंग की भी सुविधा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए कैंपस फिलहाल बाहर के लोगों के प्रवेश पर भी रोक है। उन्हें को प्रवेश दिया जा रहा है जो कैंपस से जुड़े हुए हैं। बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि कार सवार इन हथियार बंदों को प्रवेश कैसे मिला? यूनिवर्सिटी के सभी गेटों पर गार्ड मुस्तैद भी रहते हैं। कार में ऐसे लोग भी सवार थे जिन्हें गार्ड पहचाते थे इस लिए उन्हे रोकना उचित नहीं समझा? इंतजामिया को इसकी तह तक जाना ही होगा। ऐसे लोगों ने अगर एएमयू को शरणस्थली बना रखा है तो और भी गंभीर मामला है। इससे अपराधियों को ही बल मिलता है। कैंपस में पूर्व में कई घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें बाहरी लोगों की भी भूमिका सामने आई थी। ऐसे लोग अगर हॉस्टलों में प्रवेश पा रहे है तो इंतजामिया को उन छात्रों तक भी पहुंचना होगा जो उन्हे बुला रहे हैं। हॉल की सुरक्षाा व्यवस्था का भी परखने की जरूरत है। इंतजामिया के इस काम में कैंपस में लगे सीसीटीवी कैमरे कर सकते हैं। कार कहां से आईं और कहां से होकर निकलीं ये सब पता किया जा सकता है। उनके नंबर भी पता किए जा सकते हैं। एएमयू रजिस्ट्रार हब्दुल हमीद ने बताया कि मामाल गंभीर है। पूरे मामले की जांच प्रॉक्टर कर रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ठेकेदारी में हस्तक्षेप क्यों
एएमयू में ठेकेदारी का खेल बड़ा पुराना है। जिसकी एक बार चल गई वो पीछे मुडकर नहीं देखता। ऐसे ठेकेदार तभी पनपते हैं जब उन्हें कैंपस में अंदर से सपोर्ट मिलता है। ऐसा होता भी है। ये सपोर्ट किसी का भी हो सकता है। इस लिए ठेकेदार वर्चस्व के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। बुधवार को हुई घटना को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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