इतिहास रचने की तैयारी में इसरो! मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग डेट का किया ऐलान

नई दिल्ली। इसरो ने मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग डेट का ऐलान किया है। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने कहा कि आगामी 15 जुलाई को सुबह 2:51 मिनट पर इसे भेजा जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जुलाई में होने वाले अपने मिशन चंद्रयान-2 को लेकर बड़ा खुलासा किया है। इसरो का कहना है कि इस मिशन के तहत हम चंद्रमा पर उस जगह पर उतरने जा रहे हैं जहां अभी तक कोई नहीं पहुंचा है।

इससे पहले इसरो ने कहा था कि भारत के दूसरे चंद्रयान मिशन में 13 पेलोड होंगे और इसमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का भी एक उपकरण होगा। इसमें लोड किए जाने वाले 13 पेलोड में ऑर्बिट पर 8, लैंडर पर 3 और रोवर 2 के साथ नासा का एक पैसिव एक्सपेरीमेंट (उपकरण) भी शामिल होगा, हालांकि इसरो ने नासा के इस उपकरण के उद्देश्य को स्पष्ट नहीं किया।

इस अंतरिक्ष यान का वजन 3.8 टन है। यान में तीन मोड्यूल (विशिष्ट हिस्से) ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। चंद्रयान – 2 के छह सितंबर को चंद्रमा पर उतरने की संभावना है। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की दूरी पर उसका चक्कर लगायेगा, जबकि लैंडर (विक्रम) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आसानी से उतरेगा और रोवर (प्रज्ञान) अपनी जगह पर प्रयोग करेगा।

जानकारी के लिए बता दें कि चांद का एक दिन या रात धरती के 14 दिन के बराबर होता है। इसकी वजह से चांद की सतह पर तापमान तेजी से बदलता है।

चंद्रयान-2 में एक भी पेलोड विदेशी नहीं है। इसके सभी हिस्से पूरी तरह से स्वदेशी हैं, जबकि, चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में 3 यूरोप और 2 अमेरिका के पेलोड्स थे। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो 11 साल बाद एक बार फिर चंद्रमा की सतह को खंगालने के लिए तैयार है।

दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा चंद्रयान-2
इसरो ने उम्मीद जताई है कि चंद्रयान-2 चंद्रमा पर 6 सितंबर को दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं, जिनके नाम ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। इस प्रोजेक्ट की लागत 1000 करोड़ रुपए है अगर मिशन सफल हुआ तो अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चांद पर रोवर उतारने वाला चौथा देश होगा।

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सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से होगी लॉन्चिंग
चंद्रयान-2 इसरो के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से पृथ्वी की कक्षा के बाहर छोड़ा जाएगा, फिर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा। करीब 55 दिन बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद रोवर उसमें से निकलकर विभिन्न प्रयोग करेगा। चांद की सतह, वातावरण और मिट्टी की जांच करेगा। वहीं, ऑर्बिटर चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर पर नजर रखेगा।

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