आपदा को अवसर में बदलें…। PM मोदी के इस सूत्र वाक्य पर अमेरिकन कंपनी जीई ने भी किया काम

आपदा को अवसर में बदलें…। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सूत्र वाक्य पर अमेरिकन कंपनी जीई (जनरल इलेक्ट्रिक) ने भी काम किया। ऐसे समय में जब कोरोना के कारण फैक्ट्रियों व ऑफिसों में ताले लग गए। संक्रमण से बचने के लिए लोग घरों में रहे। रेलवे के रोजा स्थित लोकोमोटिव शेड में कर्मचारियों ने रात-दिन इंजनों की मेंटीनेंस की। जिसके पीछे दो कारण थे। पहला रिजर्व में इंजन तैयार रहें। दूसरा यात्री ट्रेनों का संचालन तो बंद था, लेेकिन मालगाड़ियों का आवागमन जारी था। ऐसे में इंजन की खराबी के कारण जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो। कर्मचारियों के इस कार्य की मुरादाबाद मंडल के डीआरएम ने भी सराहना की है।

हॉस्टल में ही रुके

लोकोमोटिव शेड में कार्यरत 150 इंजीनियर व कर्मचारियों में से 65 ने घर जाने की बजाय काम करने की इच्छा जतायी। अप्रैल व मई में तीन शिफ्टों में 150 से ज्यादा इंजनों की मेंटीनेंस हुई। दिल्ली, बिहार, लखनऊ आदि शहरों में रहने वाले ये इंजीनियर व कर्मचारी सामान्य दिनों में अपने किराए के आवासों में रुकते हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कुछ स्थानीय कर्मचारियों के साथ ये लोग परिसर में ही बने कंपनी के ट्रेनिंग स्कूल के हॉस्टल में रुके, जिससे ये किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आए।

90 दिन में होता है मेंटीनेंस

लोकोमोटिव शेड में तैयार इंजन की मेंटीनेंस 90 दिन बाद होती है। एक इंजन की मेंटीनेंस में तीन से चार दिन लगते हैं। सामान्य मेंटीनेंस भी कम से कम दो दिन में होती है, जिसमें इंजन की पावर चेक के अलावा माइलेज, आयल किट, नट बोल्ट के अलावा उसमें लगे सभी आधुनिक उपकरणों की सर्विस की जाती है। अतिरिक्त काम करके कर्मचारियों ने इस काम को कम समय में पूरा किया।

ये है इंजन की विशेषता

जीई कंपनी के बिहार के छपरा के मरोरा में लगे प्लांट में इंजन को फोर स्ट्रोक के साथ ही अमेरिकन तकनीकी के उपकरण, एसी, विशेष शीशे डिवाइस व अन्य समान लगाया जाता है। उसके बाद इंजन रोजा भेजा जाता है, जहां इसकी पूरी जांच के बाद इंजन में लगी डिवाइस (रिमोट मॉनीटरिंग एंड डायग्नॉस्टिक कंट्रोल) को इंस्टाल कर कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है। उसके बाद इस शेड के जरिए इंजनों के संचालन पर नजर रखी जाती है। ये हाईटेक इंजन सामान्य इंजन की तुलना में आठ से नौ फीसद तक डीजल बचाते हैं।

कर्मचारियों ने अपनी मर्जी से अतिरिक्त काम करके बेहतर नतीजे दिए। जिससे रेलवे को बेहतर सर्विस भी मिली। इनका पूरा ध्यान रखा गया। किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में न आए इसके लिए हॉस्टल में ही उनके रहने व खाने की व्यवस्था की गई थी। आपदाकाल में ड्यूटी के लिए इन्हें पुरस्कृत भी किया गया है।

सुमीत बंगा, सर्विस लीडर जीई ट्रांसपोर्टेशन ए वेबटेक कंपनी

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