
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की याचिका खारिज कर दी और स्पष्ट आदेश दिया कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई 2026 से पहले हर हाल में कराए जाएं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने सरकार की परिसीमन अधूरा होने और प्राकृतिक आपदा की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। चुनाव पुराने परिसीमन और 2011 जनगणना के आधार पर भी हो सकते हैं। आरक्षण रोस्टर तैयार करने की समय सीमा 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है।
हिमाचल उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी को 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था, जिसे सरकार ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और सभी विभागों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए।
राज्य में 3577 पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी निकाय हैं। इनका कार्यकाल जनवरी में खत्म हो चुका है और फिलहाल प्रशासक चल रहे हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सम्माननीय है और सरकार 31 मई से पहले चुनाव कराएगी। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता सूचियां तैयार हैं, अब केवल आरक्षण रोस्टर का इंतजार है। नई पंचायतों की अधिसूचना जल्द जारी होगी।



