
हरिद्वार में आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के 7वें ‘उत्तराखंड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026’ में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सर्वांगीण विकास और आर्थिक प्रगति का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मां गंगा की पावन नगरी हरिद्वार अब केवल अपनी समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से उत्तराखंड के एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही है।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि इस प्रकार के वृहद आयोजन उद्योग, व्यापार, निवेश और नए नवाचारों को एक सशक्त साझा मंच उपलब्ध कराते हैं, जिससे राज्य के समग्र आर्थिक विस्तार को नई दिशा और गति मिलती है। उद्यमियों, व्यापारियों और निवेशकों को आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिलता है और जमीनी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार केवल एक नियामक की भूमिका निभाने के बजाय एक सहयोगी और विश्वसनीय साझेदार के रूप में कार्य कर रही है, जिसका मूल उद्देश्य उद्यमियों को एक सुरक्षित, पारदर्शी और सुगम व्यापारिक परिवेश उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त राज्य बनाने के लिए चौतरफा कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में सड़क, रेल और हवाई संपर्क के तेजी से हो रहे विस्तार, विशेषकर महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना ने पूरे प्रदेश के लॉजिस्टिक्स तंत्र को सुदृढ़ किया है, जिसका सीधा लाभ औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को मिल रहा है।
राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों के शानदार परिणामों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में हाल के दिनों में 29 हजार से अधिक नई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनके जरिए लगभग 1 लाख 27 हजार युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिला है। उद्यमियों और निवेशकों की समस्याओं के पारदर्शी व त्वरित समाधान के लिए ‘निवेश मित्र’ प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है, जिसके अंतर्गत सशक्त सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से 26 विभागों की 206 से अधिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है।
इसके साथ ही युवाओं को रोजगार तलाशने वाले के स्थान पर ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने के लिए ‘उत्तराखंड स्टार्टअप नीति’ लागू करने के साथ ही स्टार्टअप्स की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 200 करोड़ रुपये का एक समर्पित वेंचर फंड भी तैयार किया गया है।
औद्योगिक विस्तार को नया आयाम देते हुए उधम सिंह नगर जिले के खुरपिया में लगभग 1,002 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक ‘इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर’ विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले समय में राज्य में भारी निवेश और रोजगार की अपार संभावनाएं लेकर आएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में औद्योगिकीकरण केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित आर्थिक विकास के लिए चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में भी विशेष औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। छोटे उद्यमियों को आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में ‘फ्लैटेड फैक्ट्री’ का निर्माण किया जा रहा है और इसी तर्ज पर सेलाकुई व पंतनगर में भी ऐसी ही आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए ‘एक जिला, दो उत्पाद’ योजना पर विशेष बल दिया जा रहा है। वर्तमान में राज्य फार्मास्यूटिकल्स, हर्बल उत्पाद, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी गर्व जताया कि राज्य की उद्योग-हितैषी नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सराहना मिली है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड को बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के तहत ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है और ‘निर्यात तत्परता सूचकांक-2024’ में अपनी श्रेणी में राज्य ने देश भर में पहला स्थान हासिल किया है।
उन्होंने सभी निवेशकों और उद्यमियों से उत्तराखंड की असीम संभावनाओं का लाभ उठाने और राज्य के विकास में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए दोहराया कि सरकार सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी व्यवस्था और बेहतर अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने सीआईआई के सफल आयोजन की सराहना की और वहां विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा लगाई गई भव्य प्रदर्शनी का निरीक्षण कर उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया।




