उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां की पुलिस ने बिना किसी जांच-पड़ताल और सत्यापन के एक ऐसे व्यक्ति को गंभीर आपराधिक मामले में नामजद आरोपी बना दिया है, जिसका लगभग दो साल पहले ही निधन हो चुका है।
एफआईआर में एक मृत व्यक्ति का नाम शामिल होने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, पुलिस की इस बड़ी लापरवाही को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। यह पूरा मामला जिले के भीटी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वनखोदवा गांव का है।
घटनाक्रम की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई, जब वनखोदवा गांव में सुषमा नामक एक महिला की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया और अगले ही दिन यानी 14 अक्टूबर को आक्रोशित भीड़ ने हत्यारोपी के घर पर धावा बोलकर वहां आगजनी की घटना को अंजाम दिया। इस आगजनी के मामले में हत्यारोपी के भाई अमन निषाद ने पुलिस को एक तहरीर दी, जिसके आधार पर भीटी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 22 लोगों को नामजद और करीब 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस की इस कार्रवाई में सबसे बड़ी चूक तब उजागर हुई जब नामजद आरोपियों की सूची में बाबूलाल निषाद के बेटे महेश कुमार निषाद का नाम भी सामने आया। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दावा किया है कि महेश कुमार निषाद की करीब दो वर्ष पूर्व ही मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी जमीनी हकीकत को जाने और बिना किसी पहचान के सत्यापन के आंख मूंदकर मुकदमा दर्ज कर लिया। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को नामजद आरोपी बनाने से पहले पुलिस को कम से कम उसकी वर्तमान स्थिति की प्रारंभिक जांच जरूर करनी चाहिए थी।
इस भारी लापरवाही के सामने आने के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासनिक उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद मृत व्यक्ति का नाम तुरंत प्रभाव से एफआईआर से हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि जिस किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही से यह कागजी भूल हुई है, उसकी जिम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया है। इस पूरे प्रकरण पर सफाई देते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) लक्ष्मीकांत ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसकी गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी तथ्य और सच्चाई सामने आएगी, उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, एक मृत व्यक्ति को जिंदा मानकर उसे बलवा और आगजनी का आरोपी बना देने का यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।



