Wednesday , April 25 2018

बफर सिस्टम छोड़िये अपनाइये खाना खाने का ये बेजोड़ देसी तरीका, मिलेगा औषधीय लाभ

भारत के गांव व छोटे कस्बों में आज भी भोजन पत्तल में खाने का रिवाज़ है। लेकिन आजकल हम स्टील या प्लास्टिक की बनी हुई प्लेटो में खाना खाते हैं। लेकिन पत्तल में खाना खाना हमारी पुरानी संस्कृति का हिस्सा रहा हैं।

बफर सिस्टम

ये कोई दकियानूसी बात नहीं थी बल्कि ये स्वास्थ्य के हिसाब से बहुत ही ऊंचा था। आज भी ज्यादातर गांवो में शादी-विवाह या कोई भी फंक्शन हो जमीन पर पत्तल में ही खाना खिलाया जाता है। मंदिरो में भी प्रसाद पत्तल में ही दिया जाता है। पत्तल पर खाना खाना सुविधा की दृष्टि से तो लाभप्रद है, किन्तु पत्तल पर खाना खाने से हमें स्वास्थ्य सम्बन्धी भी कई फायदे होते हैं।

दरअसल, जिन पत्तों से पत्तल बनते हैं। उनमें अनगिनत औषधीय गुण होते हैं। कहा जाता है कि पलाश के पत्तल में भोजन से सोने के बर्तन में भोजन करने का लाभ मिलता है। पत्तल पर भोजन करने से उस वृक्ष से संबंधित सभी औषधीय गुण भी प्राप्त हो जाते हैं। और पत्तल पर खाना खाने से मानसिक शांति भी मिलती होती है।

पलाश के पत्तों से बनी थाली पत्तलों में खाना खाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। जैसे- कफ, कृमि, अपच खांसी व पेट से संबंधी व रक्त संबंधी बहुत-सी बीमारियां होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

इसके अलावा यदि आप पत्तल पर खाना खाते हैं। तो इससे आपको दो प्रकार के फायदे होंगे।

एक तो हम पैसों की बचत करेंगे और दूसरी ओर पानी की भी बचत होगी क्योंकि हमें पत्तलों को धोने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पत्तलों को जमीन में डालकर उसकी खाद भी बनाई जा सकती है।

बेहतर स्वास्थ्य से जुड़े कई फायदों के लिए केले के पत्ते से बनी पत्तल पर भोजन करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इसी कारण से आज भी दक्षिण भारत में ज्यादातर स्थानों पर केले के पत्ते की पत्तल पर खाना परोसा जाता है।

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