जोशीमठ की जमीन धंसने से मचा कोहराम, कैसे बचाएगी सरकार 600 परिवारों की जान?

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने के कारण सैकड़ों की संख्‍या में घरों में दरारें आ गई हैं। सिंहधार वॉर्ड में भगवती मंदिर धराशायी हों चुका है। जमीन धंसनें कें बाद तबाही की पहली घटना है। जोशीमठ में करीब 603 घरों में दरारे आ चुकी हैं। इसी के मद्देनज़र सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक मंदिर और कई घरों के ढहने के बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए आज धंसते शहर जोशीमठ का दौरा करेंगे। उन्होंने फौरन लगभग 600 परिवारों को उनके घर खाली करने का आदेश दिया।

केंद्र ने धंसते जोशीमठ का “तेजी से अध्ययन” करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है। अधिकारियों ने कहा कि एक समिति बस्तियों, इमारतों, राजमार्गों, बुनियादी ढांचे और नदी प्रणालियों पर भूमि धंसने के प्रभावों का अध्ययन करेगी। बता दें कि मिश्रा आयोग की रिपोर्ट ने 1976 में ही इसकी आशंका जता दी थी। जोशीमठ की जड़ पर छेड़खानी जोशीमठ के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गया है। मिश्रा आयोग द्वारा जोशीमठ का 1976 में सर्वेक्षण किया गया था। आयोग नें जोशीमठ को एक मोरेन में बसाया हुआ था। रिपोर्ट में जोशीमठ के नीचे की जड़ से जुड़ी चट्टानों, पत्थरों कें साथ छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत दी थीं।

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने कहा, “जीवन बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों को जोशीमठ में घरों में रहने वाले लगभग 600 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है।” शहर के कई घरों में दरारें आ गयी हैं और वहां जमीन धंस रही है। डेंजर जोन, सीवर और ड्रेनेज के ट्रीटमेंट के काम में तेजी लाने का आदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जमीन पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो और लोगों को एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था भी की जाए।

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