JAPAN में आए दिन आते हैं शक्तिशाली भूकंप, बच्चा-बच्चा रहता है तैयार

l_Earthquake-In-Japan-1460358863एजेन्सी/टोक्यो।

हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले साल नेपाल में आए Earthquake ने बड़े पैमाने पर जो तबाही मचाई थी उसके बाद से ही भारत में भूकंप से होने वाले नुकसान को लेकर मंथन तो हुआ लेकिन हम बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ सके। रविवार को आए भूकंप ने इस चर्चा को एक बार फिर हवा दे दी है। इन सबके बीच हर ओर जापान की चर्चा की जा रही है। दुनिया में सबसे ज्यादा Earthquake आने वाले इलाकों में जापान शुमार है। भूकंप के बाद नुकसान को कम से कम करने के लिए जैसे प्रयास जापान में हुए हैं, वैसे दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुए हैं। 

शक्तिशाली भूकंपों में से 20 फीसदी जापान में 

दुनिया भर में भूकंपों की बात चलती है तो नाम आता है जापान का। जहां हर साल आने वाले सर्वाधिक शक्तिशाली भूकंपों में से करीब 20 फीसदी जापान में आते हैं। बावजूद इसके इन भूकंपों को झेलनी की क्षमता जापान के पास है वो दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। यहां इमारतें हिलती जरूर है लेकिन गिरती नहीं है। लोग भूकंप के बाद घबराते हैं लेकिन हड़बड़ी नहीं मचाते हैं। यही कारण है कि यहां इतने शक्तिशाली भूकंपों के बावजूद नुकसान बेहद कम होता है। 

क्यों आते हैं जापान में इतने भूकंप?

भूकंप के लिहाज से जापान बेहद संवेदनशील देश है। इसका कारण है यहां मिलने वाली धरती की सबसे अशांतटेक्टोनिक प्लेट्स। ये प्लेटें एक अभिकेंद्रित सीमा बनाती हैं, जिसके कारण ये क्षेत्र दुनिया के सर्वाधिक भूकंपों का केन्द्रबन जाता है। यहां पर पेसिफिक प्लेट, फिलिपींस प्लेट और अमरीकी प्लेट के नीचे जा रही है। यही कारण है कि जापान में हर साल छोटे-बड़े करीब एक हजार भूकंप आते हैं। जापान पेसिफिक रिंग ऑफ फायर के क्षेत्र में आता है। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर अलास्का, उत्तर अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका तक होता है। रूस, अमेरिका, कनाडा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू और ताइवान जैसे देश भी इसी सीमा में आते हैं।

मजबूत है मॉनिटरिंग सिस्टम

जापान में आए दिन आने वाले भूकंपों के मद्देनजर यहां का भूकंप मॉनिटरिंग सिस्टम काफी मजबूत है। जापान कीमेट्रॉलाजिकल एजेंसी छह स्तरों पर भूकंप की मॉनिटरिंग करती है। साथ ही भूकंप के बाद सुनामी की मॉनिटरिंग भी इसी एजेंसी के जिम्मे है।

बच्चा-बच्चा जानता है भूकंप के बारे में

जापान के स्कूलों में पढऩे वाले हर बच्चे को ये पता होता है कि वहां भूकंप आने पर क्या करना है और क्या नहीं। भूकंप के बारे में जानकारी देने के लिए यहां लगातार मॉक ड्रिल होती रहती है। जैसे ही भूकंप का अलार्म बजता है तो बिना किसी हड़बड़ाहट और एक दूसरे को पीछे छोड़कर भागने के बजाय हर बच्चा अपने डेस्क के नीचे छुप जाता है, जबकि वयस्कों की ये जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को भूकंप आने के बाद बुनियादी रूल फॉलो करवाएं। इस मॉक ड्रिल को हर महीने अपनाया जाता है। 

इमारतें हैं भूकंप रोधी

जापान में इमारतों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे बड़े से बड़े भूकंप को झेल जाएं। इसके लिए इमारतों की नींव बहुत गहरी होती है और साथ ही उनमें भूकंप के वक्त जबर्दस्त कंपन झेलने की क्षमता भी होती है। 

भूकंप के वक्त ये होता है जापान में

जापान में जैसे ही कोई भूकंप आता है सभी टेलीविजन और रेडियो भूकंप के बारे में बताना शुरु कर देते हैं। लोगों कोभूकंप के खतरे के बारे में बताया जाता है। साथ ही सुनामी के बारे में भी तुरंत चेतावनी जारी की जाती है। साथ ही लोगों को सुनामी से रक्षा करने वाले बंकरों में शरण लेने के लिए कहा जाता है। 

फुल प्रूफ होती है तैयारी

जापान के हर ऑफिस और घर में भूकंप से निपटने के लिए पूरी तैयारी रहती है। भूकंप के समय इमरजेंसी किट तैयार रखा जाता है। इस किट में खाने का सामान, पीने के लिए पानी और चिकित्सा का सामान होता है। साथ ही कार्यालयों और ऑफिसों में मजबूत हेलमेट और ग्लव्ज होते हैं, जिन्हें भूकंप आने पर तुरंत पहन लिया जाता है। 

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