
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर अपने पूर्वजों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विधि-विधान से तर्पण किया। देहरादून में इस अनुष्ठान को संपन्न करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वज ही हमारे उच्च संस्कारों, समृद्ध परंपराओं और जीवन की जड़ों का मुख्य आधार हैं, इसलिए उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना हमारी सनातन संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पितृ पक्ष के इस अंतिम दिन उन्होंने अपने पितरों का स्मरण करते हुए यह प्रार्थना की कि उनका आशीर्वाद, कृपा और स्नेह सदैव सब पर बना रहे। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, महालया के दिन 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष का विधिवत समापन हो जाता है और इसी दिन से मां दुर्गा के धरती पर आगमन के प्रतीक स्वरूप ‘देवी पक्ष’ का शुभ आरंभ होता है। ऐसी गहरी धार्मिक आस्था है कि इस दिन सच्चे मन से तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके लिए स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
पितृ विसर्जन के इस पवित्र अवसर पर केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को पूरे आदर के साथ विदाई दी। बिहार के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गया में बड़ी संख्या में लोगों ने मोक्षदायिनी फल्गु नदी में आस्था की डुबकी लगाई और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व श्राद्ध कर्म किया। इसी प्रकार, दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भी महालया अमावस्या (जिसे वहां तमिल माह पुरत्तासी में मनाया जाता है) के अवसर पर भारी जनसैलाब उमड़ा।
तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में पवित्र कावेरी नदी के घाटों पर तंजावुर, अरियालुर, पेरम्बलुर और पुदुक्कोट्टई सहित राज्य के कई जिलों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर तर्पण के अनुष्ठान संपन्न किए। धार्मिक कर्मकांड पूरे करने के बाद लोगों ने श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, थिरुवनैकवल जंबुकेश्वरर मंदिर और समयपुरम मरिअम्मन मंदिर जैसे प्रमुख देवस्थानों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना की।
इसके अलावा रामेश्वरम में भी अग्नि तीर्थम के पास समुद्र में पवित्र स्नान करने और तर्पण करने वाले भक्तों की भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने अपने पूर्वजों को अंतिम विदाई देते हुए उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट की।




