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इलाहाबाद हाईकोर्ट की बिजनौर डीएम को कड़ी फटकार: कहा- ‘जिले में तानाशाह की तरह शक्तियों का इस्तेमाल न करें जिलाधिकारी’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग को लेकर एक सख्त मिसाल पेश करते हुए बिजनौर के जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा जारी किए गए एक मनमाने आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जिलाधिकारियों को अपने संबंधित जिलों में खुद को ‘प्लेनिपोटेंटियरी’ (पूर्ण अधिकार प्राप्त शासक या दूत) नहीं समझना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने का कोई अधिकार नहीं है, जो सीधे तौर पर किसी न्यायाधीश या अन्य वैधानिक प्राधिकारी के कानूनी अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करती हों।

यह पूरा विवाद बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले फिओना गांव में आयोजित होने वाले पारंपरिक और ऐतिहासिक ‘जाहर दीवान (गोगा नौमी)’ मेले के प्रबंधन और संचालन से जुड़ा हुआ है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई करते हुए बिजनौर डीएम के आदेश को प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर और अनुचित करार दिया।

अदालत के समक्ष यह तथ्य प्रस्तुत किया गया कि वर्ष 1997 में बिजनौर की सिविल कोर्ट ने इस मेले के प्रबंधन को लेकर ‘प्रबंध समिति, सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज’ के पक्ष में एक स्पष्ट फैसला सुनाया था, जिसमें ग्राम सभा को मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोक दिया गया था। इतने पुराने और स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद, वर्तमान जिलाधिकारी ने सिविल कोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए मेले के संचालन और उससे प्राप्त होने वाले राजस्व का पूरा अधिकार ग्राम सभा को सौंप दिया था, और इसके लिए तीन अधिकारियों की एक विशेष समिति भी गठित कर दी थी।

अधिकारियों के इस मनमाने रवैये पर लगाम कसते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर डीएम के विवादित आदेश को निलंबित कर दिया है और याचिकाकर्ता समिति को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने समिति को फिओना गांव की निर्दिष्ट भूमि (गाटा संख्या 981 और 997) पर अपने पारंपरिक मेले के आयोजन की विधिवत अनुमति दे दी है। हालांकि, इसके लिए समिति को नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

अपने आदेश की गंभीरता और तात्कालिकता को सुनिश्चित करने के लिए, उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) बिजनौर को सख्त निर्देश दिए हैं कि यह आदेश हर हाल में 24 घंटे के भीतर बिजनौर डीएम और मामले से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारियों तक तामील कराया जाए।

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